Bihar: उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाले मोकामा-औंटा-सिमरिया सिक्स-लेन पुल की मजबूती पर सवाल उठने लगे हैं। करीब 1900 करोड़ रुपये की लागत से बने इस पुल का उद्घाटन 22 अगस्त 2025 को हुआ था, लेकिन अप्रैल 2026 तक इसके एक्स
Bihar: उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाले मोकामा-औंटा-सिमरिया सिक्स-लेन पुल की मजबूती पर सवाल उठने लगे हैं। करीब 1900 करोड़ रुपये की लागत से बने इस पुल का उद्घाटन 22 अगस्त 2025 को हुआ था, लेकिन अप्रैल 2026 तक इसके एक्सपेंशन जॉइंट्स (Expansion Joint) की मरम्मत का काम शुरू करना पड़ा। राजेंद्र सेतु के जर्जर होने के बाद लोगों को इस नए पुल से काफी उम्मीदें थीं, लेकिन इतनी जल्दी मेंटेनेंस शुरू होने से लोग परेशान हैं।
पुल में क्या खराबी आई और क्यों हो रही है मरम्मत?
पुल पर लगे एक्सपेंशन जॉइंट्स के रखरखाव का काम कटर और मशीनों की मदद से किया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि आम तौर पर इन जॉइंट्स की जांच हर 2 से 3 साल में एक बार होती है, लेकिन यहां महज 8 महीने में ही काम शुरू हो गया। निर्माण कंपनी इसे नियमित जांच बता रही है, जबकि स्थानीय लोग इसे निर्माण की खराब गुणवत्ता से जोड़कर देख रहे हैं।
निर्माण में लापरवाही या ओवरलोडिंग बनी वजह?
यह पुल आधुनिक ‘एक्स्ट्राडोज्ड’ केबल तकनीक से बना है, जिसे भारी दबाव झेलने के लिए डिजाइन किया गया था। इसके बावजूद मरम्मत की नौबत आने पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं:
- क्या जॉइंट्स की फिटिंग में कोई तकनीकी कमी रह गई थी?
- क्या निर्माण में इस्तेमाल सामग्री मानकों के हिसाब से सही नहीं थी?
- क्या जल्दबाजी में उद्घाटन करने के कारण फिनिशिंग में कोताही बरती गई?
- क्या रूट पर चलने वाले ओवरलोडेड ट्रकों का दबाव ज्यादा पड़ा?
आम जनता और ट्रैफिक पर क्या असर पड़ रहा है?
मेंटेनेंस के काम की वजह से पुल पर जगह-जगह बैरिकेड्स लगाए गए हैं, जिससे ट्रैफिक की रफ्तार धीमी हो गई है। राहगीरों का कहना है कि NHAI और प्रशासन को इस मामले में जवाबदेही तय करनी चाहिए। 1871 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाले इस महासेतु की सेहत इतनी जल्दी खराब होना इंजीनियरिंग पर बड़ा सवालिया निशान है।