Bihar के सहरसा में नौकरी ठगी गिरोह का भंडाफोड़, पुलिस भर्ती परीक्षा में करोड़ों की धोखाधड़ी करने वाले 6 गिरफ्तार

सहरसा: बिहार में सरकारी नौकरी पाने की चाहत रखने वाले युवाओं को ठगने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। सहरसा पुलिस ने कार्रवाई करते हुए ऐसे गिरोह के 6 सदस्यों को गिरफ्तार किया है जो बिहार पुलिस भर्ती परीक्षा में करोड

सहरसा: बिहार में सरकारी नौकरी पाने की चाहत रखने वाले युवाओं को ठगने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। सहरसा पुलिस ने कार्रवाई करते हुए ऐसे गिरोह के 6 सदस्यों को गिरफ्तार किया है जो बिहार पुलिस भर्ती परीक्षा में करोड़ों रुपये की ठगी कर रहे थे। यह नेटवर्क केवल एक जिले तक सीमित नहीं था, बल्कि पूरे राज्य में फैला हुआ था।

पुलिस की जांच में सामने आया कि यह गिरोह उम्मीदवारों से नौकरी दिलाने के नाम पर मोटी रकम वसूलता था। कुछ छात्रों से करीब 8 लाख रुपये लिए गए, जबकि कुछ मामलों में 5 से 6 लाख रुपये की डील हुई थी। गारंटी के तौर पर ठग उम्मीदवारों से उनके असली शैक्षणिक दस्तावेज और खाली चेक भी ले लेते थे। सहरसा के अलावा इस गिरोह के तार भागलपुर, पटना, खगड़िया और मुजफ्फरपुर जैसे कई जिलों से जुड़े हुए हैं।

भर्ती परीक्षा में धोखाधड़ी के लिए हाई-टेक उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा था। पुलिस ने मौके से ब्लूटूथ डिवाइस, ईयर पीस, एंटी-जैमर डिवाइस, वॉकी-टॉकी, लैपटॉप और कई मोबाइल फोन बरामद किए हैं। कुछ मामलों में तो ब्लूटूथ को कान के बहुत अंदर फिट किया गया था ताकि पकड़े न जाएं। बायोमेट्रिक सत्यापन के दौरान फिंगरप्रिंट मैच न होने की वजह से इस पूरे खेल का खुलासा हुआ।

इस मामले में कई गिरफ्तारियां हुई हैं, जिनमें चंदन कुमार और विवेक कुमार जैसे लोग शामिल हैं। पुलिस ने बताया कि बिहार पुलिस रेडियो सिपाही भर्ती और कांस्टेबल परीक्षा में भी इसी तरह के ‘मुन्नाभाई’ और सॉल्वर गैंग सक्रिय थे। इस पूरे घोटाले की गंभीरता को देखते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच शुरू कर दी है और कई राज्यों में छापेमारी की है।

बिहार पुलिस के अधिकारियों ने साफ किया है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे, इसके लिए यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े और भी लोगों की गिरफ्तारी हो सकती है।