Bihar: रोहतास जिले के करवंदिया पहाड़ पर करीब 25 साल के लंबे इंतजार के बाद एक बार फिर पत्थर खनन शुरू होने जा रहा है। सरकार ने इसकी तैयारी तेज कर दी है, जिससे न केवल स्थानीय लोगों बल्कि आसपास के राज्यों के हजारों मजदूरों औ
Bihar: रोहतास जिले के करवंदिया पहाड़ पर करीब 25 साल के लंबे इंतजार के बाद एक बार फिर पत्थर खनन शुरू होने जा रहा है। सरकार ने इसकी तैयारी तेज कर दी है, जिससे न केवल स्थानीय लोगों बल्कि आसपास के राज्यों के हजारों मजदूरों और कामगारों को रोजगार मिलने की उम्मीद है। इस फैसले से इलाके के बंद पड़े क्रशर उद्योगों में भी नई जान आएगी।
खनन कार्य दोबारा शुरू होने की क्या है पूरी प्रक्रिया
राज्य के विकास आयुक्त की अध्यक्षता में हुई एक हाई-लेवल मीटिंग में पत्थर के भूखंडों को बंदोबस्त करने का फैसला लिया गया है। जिला खनन पदाधिकारी रणधीर कुमार ने बताया कि खदानों का सर्वे अंतिम चरण में है। जिन भूखंडों को वन, पर्यटन और कला एवं संस्कृति विभाग से NOC मिल चुकी है, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी। राज्य सरकार की मंजूरी मिलते ही जल्द ही टेंडर की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
किन क्षेत्रों में होगा काम और क्या रही अब तक की रुकावट
बिहार के सात जिलों में कुल 41 पत्थर खनन क्षेत्रों की पहचान की गई थी। इनमें से 31 क्षेत्रों को जरूरी विभागों से मंजूरी मिल चुकी है, जबकि 10 भूखंड धार्मिक, ऐतिहासिक या वन क्षेत्र में होने के कारण अभी अटका हुआ है। करवंदिया पहाड़ अपने बेहतरीन काले पत्थर के लिए मशहूर है, लेकिन जून 2012 में यहाँ खनन पूरी तरह बंद हो गया था। 2015 में भी कोशिश हुई थी, लेकिन वन विभाग की आपत्ति के कारण काम रुक गया था।
स्थानीय लोगों और उद्योगों पर क्या होगा असर
करवंदिया पहाड़ में खनन शुरू होने से रोहतास के साथ-साथ झारखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के लोगों को भी काम मिलेगा। 2012 में खनन बंद होने से जिले के क्रशर मालिकों को बहुत नुकसान हुआ था और कई लोग बेरोजगार हो गए थे। अब इस काम के दोबारा शुरू होने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और निर्माण कार्यों के लिए पत्थर की उपलब्धता आसान होगी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
करवंदिया पहाड़ में खनन कितने समय बाद शुरू हो रहा है?
करवंदिया पहाड़ में करीब 25 साल के अंतराल के बाद खनन शुरू करने की तैयारी है। यहाँ जून 2012 में खनन कार्य पूरी तरह से बंद कर दिया गया था।
खनन शुरू होने के लिए क्या शर्तें रखी गई हैं?
सरकार केवल उन्हीं भूखंडों को प्राथमिकता दे रही है जिन्हें वन, पर्यटन और कला एवं संस्कृति विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) मिल चुका है और जिनका सर्वे पूरा हो गया है।