Bihar: बिहार के राजस्व कर्मचारियों ने अपनी लंबी अनिश्चितकालीन हड़ताल वापस ले ली है। 9 मार्च से जारी यह हड़ताल अब आधिकारिक तौर पर समाप्त हो गई है और सभी कर्मचारी 4 मई, 2026 से अपने काम पर वापस लौटेंगे। इस फैसले से उन लाखो
Bihar: बिहार के राजस्व कर्मचारियों ने अपनी लंबी अनिश्चितकालीन हड़ताल वापस ले ली है। 9 मार्च से जारी यह हड़ताल अब आधिकारिक तौर पर समाप्त हो गई है और सभी कर्मचारी 4 मई, 2026 से अपने काम पर वापस लौटेंगे। इस फैसले से उन लाखों लोगों को बड़ी राहत मिलेगी जिनके जमीन से जुड़े काम पिछले करीब दो महीनों से रुके हुए थे।
हड़ताल खत्म होने की मुख्य वजह और शर्तें क्या हैं?
यह निर्णय मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार और बिहार संयुक्त राजस्व सेवा महासंघ के बीच हुई बातचीत के बाद लिया गया है। सरकार ने कर्मचारियों की 11 सूत्रीय मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का भरोसा दिया है। महासंघ ने जनता को हो रही परेशानी को देखते हुए काम पर लौटने का फैसला किया, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर दो महीने के भीतर मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे फिर से सामूहिक अवकाश का सहारा लेंगे।
आम जनता के किन कामों पर पड़ेगा असर?
पिछले 52 से 55 दिनों से राजस्व कर्मचारियों की हड़ताल की वजह से अंचल कार्यालयों में काम ठप था। अब 4 मई से कर्मचारी वापस लौटेंगे, जिससे दाखिल-खारिज (Mutation), जाति-आय प्रमाण पत्र और भू-सर्वेक्षण जैसे जरूरी काम फिर से शुरू हो जाएंगे। इस हड़ताल ने जनगणना 2027 के पहले चरण के काम को भी प्रभावित किया था, जो अब पटरी पर लौटेगा।
अधिकारियों के निलंबन और प्रशासनिक बदलाव का असर
पहले की सरकार ने हड़ताली कर्मचारियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए करीब 200 से ज्यादा कर्मचारियों को निलंबित किया था और वेतन रोकने की चेतावनी दी थी। हालांकि, नई सम्राट चौधरी सरकार ने इन निलंबनों को रद्द कर दिया। साथ ही, विभाग के प्रधान सचिव सी.के. अनिल के स्थान पर जय कुमार सिंह की नियुक्ति को भी माहौल बदलने में एक बड़ा कारण माना जा रहा है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
राजस्व कर्मचारी कब से काम पर लौटेंगे?
बिहार के सभी राजस्व कर्मचारी 4 मई, 2026 से अपने कार्यालयों में काम पर लौटेंगे। यह निर्णय 30 अप्रैल को हड़ताल समाप्त करने की घोषणा के बाद लिया गया है।
हड़ताल कितने दिनों तक चली और इसका क्या असर हुआ?
यह हड़ताल 9 मार्च से 30 अप्रैल तक लगभग 52 से 55 दिनों तक चली। इस दौरान जमीन की रजिस्ट्री, दाखिल-खारिज और प्रमाण पत्रों जैसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्य पूरी तरह प्रभावित रहे।