Bihar: बिहार सरकार राशन कार्ड की सूची को साफ कर रही है जिससे लाखों लोगों के नाम काटे जा रहे हैं। आधार वेरिफिकेशन के बाद अब तक 52.22 लाख से ज्यादा लाभार्थियों के नाम हटाए जा चुके हैं। सरकार का मकसद उन लोगों को बाहर करना ह
Bihar: बिहार सरकार राशन कार्ड की सूची को साफ कर रही है जिससे लाखों लोगों के नाम काटे जा रहे हैं। आधार वेरिफिकेशन के बाद अब तक 52.22 लाख से ज्यादा लाभार्थियों के नाम हटाए जा चुके हैं। सरकार का मकसद उन लोगों को बाहर करना है जो अब इस सुविधा के हकदार नहीं हैं, ताकि सही लोगों तक राशन पहुंच सके।
राशन कार्ड से नाम क्यों काटे जा रहे हैं?
खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने आधार आधारित e-KYC वेरिफिकेशन शुरू किया है। इस जांच में पाया गया कि कई लोगों के आधार विवरण गलत थे या मौजूद नहीं थे। इसके अलावा, जिन लोगों की मृत्यु हो चुकी है, जिनकी बेटियां शादी के बाद दूसरे घर जा चुकी हैं या जिनके पास एक से ज्यादा राशन कार्ड हैं, उनके नाम हटाए जा रहे हैं। साथ ही सरकारी कर्मचारी, टैक्स भरने वाले लोग और जिनके पास पक्का मकान या चार पहिया वाहन है, उन्हें भी अपात्र माना गया है।
e-KYC की आखिरी तारीख और जरूरी नियम
सरकार ने e-KYC करवाने की समय सीमा को 30 अप्रैल 2026 तक बढ़ा दिया है। अगर इस तारीख तक वेरिफिकेशन नहीं हुआ, तो राशन मिलना बंद हो जाएगा और नाम सूची से काट दिया जाएगा। लोग अपने नजदीकी Fair Price Shop (FPS) पर जाकर e-PoS मशीन के जरिए या EPDS Bihar पोर्टल के माध्यम से अपना स्टेटस चेक कर सकते हैं। अब पोर्टल पर राशन कार्ड डाउनलोड और आधार लिंक स्टेटस देखना पहले से आसान हो गया है।
PDS के जरिए मिलेगा घरेलू कोयला
सरकार ने एक नई योजना शुरू की है जिसके तहत 21 मिलियन राशन कार्ड धारकों को खाना पकाने के लिए घरेलू कोयला बांटा जाएगा। यह कदम एलपीजी गैस की बढ़ती कीमतों और सप्लाई की दिक्कतों को देखते हुए उठाया गया है। विभाग के सचिव अभय कुमार सिंह ने बताया कि कोयला PDS दुकानों पर उपलब्ध होने में एक महीने से ज्यादा का समय लग सकता है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
राशन कार्ड e-KYC की आखिरी तारीख क्या है?
बिहार सरकार ने राशन कार्ड धारकों के लिए आधार आधारित e-KYC वेरिफिकेशन की समय सीमा 30 अप्रैल 2026 तक बढ़ा दी है।
राशन कार्ड से नाम कटने के मुख्य कारण क्या हैं?
गलत आधार विवरण, मृत्यु, शादी के बाद घर बदलना, एक से अधिक कार्ड होना या सरकारी नौकरी और टैक्स पेयर होना मुख्य कारण हैं।