Bihar: राज्य के प्राइवेट स्कूलों में अब मनमानी नहीं चलेगी। बिहार शिक्षा विभाग ने 1 जुलाई से 31 जुलाई 2026 तक सभी मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों की सघन जांच कराने का फैसला किया है। सरकार ने यह कदम अभिभावकों से मिल रही फीस व
Bihar: राज्य के प्राइवेट स्कूलों में अब मनमानी नहीं चलेगी। बिहार शिक्षा विभाग ने 1 जुलाई से 31 जुलाई 2026 तक सभी मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों की सघन जांच कराने का फैसला किया है। सरकार ने यह कदम अभिभावकों से मिल रही फीस वृद्धि और सुविधाओं की कमी की शिकायतों के बाद उठाया है। शिक्षा विभाग ने इस काम के लिए सभी प्रमंडलीय आयुक्तों को चिट्ठी भेज दी है।
जांच में किन बातों पर रहेगा मुख्य फोकस
इस अभियान के दौरान अधिकारी स्कूलों में शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE) 2009 और 2011 की नियमावली के पालन की जांच करेंगे। मुख्य रूप से स्कूल की बिल्डिंग की सुरक्षा, क्लासरूम, शौचालय और पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं को देखा जाएगा। साथ ही यह भी जांचा जाएगा कि स्कूल में शिक्षकों की संख्या पर्याप्त है या नहीं और बच्चों को खेल का मैदान मिल रहा है या नहीं।
कौन से अधिकारी करेंगे स्कूलों की चेकिंग
इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी शिक्षा विभाग के सचिव विनोद सिंह गुंजियाल और शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी कर रहे हैं। जांच टीम में प्रमंडलीय आयुक्त, जिलाधिकारी (DM), उप विकास आयुक्त, SDM, जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) और BDO शामिल होंगे। सरकार ने साफ किया है कि फर्जी मदरसों और संस्कृत विद्यालयों की भी जांच होगी और फर्जी पाए जाने पर उन्हें तुरंत बंद कर दिया जाएगा।
नियम तोड़ने वाले स्कूलों पर क्या होगी कार्रवाई
बिहार में फिलहाल 19,186 निजी स्कूल रजिस्टर्ड हैं और 1,012 स्कूलों की मान्यता की प्रक्रिया चल रही है। जांच के दौरान अगर कोई स्कूल फीस वसूली में गड़बड़ी करता है या बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा की गुणवत्ता से समझौता करता पाया गया, तो उसकी मान्यता रद्द कर दी जाएगी। सम्राट चौधरी सरकार ने स्पष्ट किया है कि शिक्षा के नाम पर किसी भी तरह का फर्जीवाड़ा बर्दाश्त नहीं होगा।
Frequently Asked Questions (FAQs)
बिहार के प्राइवेट स्कूलों की जांच कब से कब तक होगी
बिहार शिक्षा विभाग ने 1 जुलाई से 31 जुलाई 2026 तक राज्य के सभी मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों की सघन जांच कराने का निर्णय लिया है।
जांच के दौरान किन मुख्य बिंदुओं को देखा जाएगा
जांच में स्कूल की बिल्डिंग सुरक्षा, छात्र-शिक्षक अनुपात, RTE नियमों का पालन, फीस निर्धारण की प्रक्रिया और बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं की जांच की जाएगी।