Bihar: बिहार पुलिस अब अपराध की गुत्थी सुलझाने के लिए वैज्ञानिक जांच को और तेज करने जा रही है। अगले एक से दो सालों में राज्य के सभी पुलिस रेंज में विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) की सुविधा शुरू हो जाएगी। डीजीपी विनय कुमार न
Bihar: बिहार पुलिस अब अपराध की गुत्थी सुलझाने के लिए वैज्ञानिक जांच को और तेज करने जा रही है। अगले एक से दो सालों में राज्य के सभी पुलिस रेंज में विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) की सुविधा शुरू हो जाएगी। डीजीपी विनय कुमार ने जानकारी दी है कि इस विस्तार से राज्य में कुल 13 FSL सेंटर हो जाएंगे जिससे पुलिस की जांच क्षमता में तीन गुना की बढ़ोतरी होगी। इसके साथ ही जिलों में मोबाइल लैब वैन भी भेजी जाएंगी जिससे घटनास्थल पर ही सबूत जुटाना आसान होगा।
नई व्यवस्था से जांच में कैसे आएगी तेजी?
बिहार में अभी केवल पटना, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और राजगीर में ही फॉरेंसिक लैब काम कर रही हैं। नई व्यवस्था के तहत नौ और क्षेत्रीय लैब को चालू किया जाएगा। नए कानून BNSS के तहत अब उन सभी अपराधों में फॉरेंसिक जांच जरूरी है जिनमें सात साल से ज्यादा की सजा का प्रावधान है। अधिकारियों का कहना है कि पहले राज्य में बहुत कम मामलों में फॉरेंसिक मदद ली जाती थी लेकिन अब सालाना करीब 18,000 मामलों को संभाला जा रहा है।
- कुल 13 FSL लैब: अगले दो साल में पूरी तरह तैयार हो जाएंगी।
- मोबाइल वैन: 28 जिलों के लिए 50 मोबाइल FSL वैन उपलब्ध होंगी।
- नई भर्तियां: 102 सहायक निदेशक और 200 संविदा कर्मियों की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी हुई।
- बिल्डिंग निर्माण: नौ क्षेत्रीय लैब के भवन तैयार हो चुके हैं।
साइबर और डीएनए जांच के लिए क्या है खास तैयारी?
बढ़ते साइबर अपराध को देखते हुए पटना और राजगीर में साइबर फॉरेंसिक लैब भी शुरू की जा रही हैं। इसके लिए गुजरात की नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी (NFSU) के साथ समझौता किया गया है। डीएनए टेस्ट में होने वाली देरी को कम करने के लिए तीन से चार नई डीएनए लैब बनाने का भी प्रस्ताव है जिसके लिए केंद्र सरकार से वित्तीय सहायता मांगी गई है। मोबाइल फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं के लिए 28 जिलों में बिल्डिंग का निर्माण काम पूरा हो गया है। इससे ग्रामीण और शहरी इलाकों में पुलिस को केस सुलझाने में बड़ी मदद मिलेगी।