Bihar : प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के जरिए पारंपरिक कारीगरों को मदद दी जा रही है, लेकिन बिहार में इसका फायदा राष्ट्रीय औसत के मुकाबले काफी कम लोगों तक पहुंचा है। जागरूकता की कमी और डिजिटल जानकारी न होना इसके बड़े कारण
Bihar : प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के जरिए पारंपरिक कारीगरों को मदद दी जा रही है, लेकिन बिहार में इसका फायदा राष्ट्रीय औसत के मुकाबले काफी कम लोगों तक पहुंचा है। जागरूकता की कमी और डिजिटल जानकारी न होना इसके बड़े कारण हैं। सरकार ने इस योजना के लिए 13,000 करोड़ रुपये का बजट रखा है, ताकि 18 तरह के पारंपरिक कामों से जुड़े लोगों को आर्थिक मजबूती मिल सके।
योजना में क्या फायदे मिलते हैं और कौन है पात्र
इस योजना में 18 तरह के पारंपरिक ट्रेड से जुड़े 18 साल से ऊपर के लोग आवेदन कर सकते हैं। पात्र लोगों को निम्नलिखित लाभ दिए जाते हैं:
- PM Vishwakarma सर्टिफिकेट और आईडी कार्ड मिलता है।
- ट्रेनिंग के दौरान 500 रुपये प्रतिदिन का स्टाइपेंड दिया जाता है।
- आधुनिक औजार खरीदने के लिए 15,000 रुपये का ई-वाउचर मिलता है।
- डिजिटल ट्रांजेक्शन करने पर हर महीने 100 ट्रांजेक्शन तक 1 रुपये का इंसेंटिव मिलता है।
- मार्केटिंग, ब्रांडिंग और GeM पोर्टल पर सामान बेचने में मदद की जाती है।
लोन की सुविधा और आवेदन की शर्तें क्या हैं
कारीगरों को बिना किसी गारंटी के लोन दिया जाता है, जिसे दो किस्तों में बांटा गया है। पहली किस्त 1 लाख रुपये (18 महीने के लिए) और दूसरी किस्त 2 लाख रुपये (30 महीने के लिए) होती है। इस लोन पर ब्याज दर सिर्फ 5% है, बाकी 8% का बोझ सरकार उठाती है। हालांकि, लोन के लिए कुछ शर्तें हैं:
| शर्त |
विवरण |
| पारिवारिक सीमा |
एक परिवार से केवल एक सदस्य पात्र है |
| सरकारी नौकरी |
सरकारी कर्मचारी या उनके परिवार वाले पात्र नहीं हैं |
| पिछला लोन |
पिछले 5 साल में ऐसी किसी सरकारी योजना का लाभ न लिया हो |
बिहार में लाभ कम मिलने की मुख्य वजह क्या है
बिहार में योजना की धीमी रफ्तार के पीछे डिजिटल निरक्षरता और प्रशासनिक दिक्कतें हैं। कई कारीगर ऑनलाइन आवेदन करने में सक्षम नहीं हैं। बैंकों की तरफ से भी लोन मिलने में दिक्कत आ रही है, क्योंकि कई आवेदन डॉक्यूमेंट की कमी या क्रेडिट स्कोर खराब होने के कारण रिजेक्ट हो जाते हैं। हालांकि, हाल ही में बोधगया और राजगीर जैसे शहरों में इवेंट्स के जरिए कारीगरों को जोड़ा गया है। आंकड़ों के मुताबिक, बिहार में 1.62 लाख कारीगर रजिस्टर्ड हुए हैं और करीब 19,000 लाभार्थियों को 160 करोड़ रुपये का लोन मिला है।