Bihar के 8 जिलों में दूर होगी पानी की किल्लत, PHED ने तैयार किया 5,000 करोड़ का प्लान
Bihar: राज्य के कई जिलों में जमीन के नीचे पानी का स्तर लगातार गिर रहा है, जिससे लोगों को पीने के पानी के लिए भारी परेशानी हो रही है। इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए Public Health Engineering Department (PHED) ने एक
Bihar: राज्य के कई जिलों में जमीन के नीचे पानी का स्तर लगातार गिर रहा है, जिससे लोगों को पीने के पानी के लिए भारी परेशानी हो रही है। इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए Public Health Engineering Department (PHED) ने एक बड़ी योजना बनाई है। विभाग अब उन इलाकों में सतही जल (surface water) के जरिए सुरक्षित पीने का पानी पहुंचाएगा जहां ग्राउंड वाटर खत्म हो रहा है।
इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 5,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है, जिसके लिए प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया गया है। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, बढ़ते तापमान और हीटवेव की वजह से गांवों में गहरे ट्यूबवेल भी सूखने लगे हैं। पटना, गया, नवादा, नालंदा, बांका, जमुई, औरंगाबाद, बक्सर, भागलपुर, लखीसराय, शेखपुरा, कैमूर, जहानाबाद और अरवल के साथ-साथ भोजपुर जिले में भी पानी का संकट बढ़ गया है। गर्मी के मौसम में करीब 1445 पंचायतों में ग्राउंड वाटर की भारी कमी देखी गई है।
विभाग ने इस योजना के लिए बांका, जमुई, गया, नवादा, कैमूर, भागलपुर और मुंगेर जैसे जिलों को चुना है। लक्ष्य यह है कि काम शुरू होने के दो साल के भीतर इस प्रोजेक्ट को पूरा कर लिया जाए। रिपोर्ट के अनुसार, बिहार के कई ब्लॉकों की स्थिति काफी गंभीर है।
| जिला | गंभीर स्थिति वाले ब्लॉक | |
|---|---|---|
| नालंदा | 10 | |
| मुजफ्फरपुर | 5 | |
| नवादा | 5 | |
| पटना | 5 | |
| गया | 4 | |
| भागलपुर | 4 | |
| समस्तीपुर | 4 | |
| भोजपुर | 3 | |
| जहानाबाद | 3 | |
| रोहतास | 2 | |
| कैमूर | 1 | |
| शेखपुरा | 1 | |
| वैशाली | 1 |
सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड की रिपोर्ट बताती है कि साल 2004 में बिहार में ग्राउंड वाटर का इस्तेमाल 10.77 BCM था, जो 2025 तक बढ़कर 14.47 BCM हो गया है। इसका मतलब है कि पानी के इस्तेमाल में करीब 34 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इस बीच, सरकार ने दक्षिण बिहार के सूखा प्रभावित जिलों में बिना रुकावट पानी की सप्लाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। खराब हैंडपंपों और पाइपलाइन सिस्टम को ठीक करने के लिए मोबाइल रिपेयर टीमें और वाटर टैंकर भी तैनात किए गए हैं।