Bihar में पेपर लीक अब ‘संगठित अपराध’, आरोपियों की संपत्ति होगी जब्त और नहीं मिलेगी जमानत
Bihar: राज्य में प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक करने वाले गिरोहों पर अब सरकार ने बहुत सख्त रुख अपनाया है। पेपर लीक को अब साधारण अपराध नहीं बल्कि ‘संगठित अपराध’ (Organized Crime) माना जाएगा। इसके लिए बिहार सर
Bihar: राज्य में प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक करने वाले गिरोहों पर अब सरकार ने बहुत सख्त रुख अपनाया है। पेपर लीक को अब साधारण अपराध नहीं बल्कि ‘संगठित अपराध’ (Organized Crime) माना जाएगा। इसके लिए बिहार सरकार ने नए कानूनी बदलाव किए हैं जिससे दोषियों को जेल से बाहर आना मुश्किल होगा और उनकी जमा-पूंजी भी जब्त की जा सकेगी।
बिहार मंत्रिमंडल ने 21 जुलाई, 2026 को बिहार अपराध नियंत्रण अधिनियम, 2024 में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी, जिसे 22 जुलाई, 2026 को विधानसभा ने पारित कर दिया। इस नए कानून का मुख्य मकसद उन गिरोहों को खत्म करना है जो युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करते हैं। अब पेपर लीक के आरोपियों पर ‘गुंडा एक्ट’ के प्रावधान लागू होंगे।
इस नए नियम के बाद अब पुलिस भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के साथ-साथ गुंडा एक्ट का इस्तेमाल करेगी, जिससे आरोपियों को जमानत मिलना बहुत कठिन हो जाएगा। साथ ही, अपराध में शामिल लोगों की संपत्ति को जब्त करने का भी प्रावधान रखा गया है। प्रशासन को यह अधिकार दिया गया है कि वह संदिग्धों पर सीधी निगरानी रखे और जरूरत पड़ने पर उन्हें जिलाबदर (शहर से बाहर निकालना) जैसी कड़ी कार्रवाई भी कर सके।
| मुख्य प्रावधान | विवरण |
|---|---|
| जांच अधिकारी | पुलिस उपाधीक्षक (DSP) रैंक के अधिकारी जांच करेंगे |
| कानून का नाम | बिहार अपराध नियंत्रण (संशोधन) विधेयक, 2026 |
| मुख्य कार्रवाई | संपत्ति जब्ती और जमानत में कठिनाई |
| प्रशासनिक शक्ति | संदिग्धों की निगरानी और जिलाबदर का अधिकार |
| प्रभावी तिथि | मूल अधिनियम 14 मार्च, 2024 से प्रभावी है |
उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने बताया कि यह कदम साइबर अपराध और सोशल मीडिया के गलत इस्तेमाल से निपटने के लिए उठाया गया है। सरकार का मानना है कि पेपर लीक अब एक सुनियोजित साजिश बन चुका है जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह कानून पहले से मौजूद बिहार लोक परीक्षा विधेयक, 2024 और केंद्र सरकार के सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम, 2024 के अतिरिक्त होगा।