Bihar में बारिश के बाद धान की रोपनी में आई तेजी, किसानों के लिए PMFBY बीमा की अंतिम तारीख 31 जुलाई
Bihar: बिहार के गांवों में अषाढ के महीने में होने वाली धान की रोपनी केवल खेती नहीं बल्कि एक सामुदायिक उत्सव की तरह है। मध्य जुलाई में हुई बारिश के बाद राज्य के कई जिलों में रोपाई के काम में तेजी आई है। किसान एक-दूसरे की
Bihar: बिहार के गांवों में अषाढ के महीने में होने वाली धान की रोपनी केवल खेती नहीं बल्कि एक सामुदायिक उत्सव की तरह है। मध्य जुलाई में हुई बारिश के बाद राज्य के कई जिलों में रोपाई के काम में तेजी आई है। किसान एक-दूसरे की मदद के लिए ‘पलटा’ और ‘हुड़का’ जैसी पारंपरिक प्रणालियों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे ग्रामीण संस्कृति और आपसी सहयोग की झलक दिखती है।
बिहार कृषि विभाग ने इस सीजन के लिए 37.83 लाख हेक्टेयर का लक्ष्य रखा है। जुलाई के पहले हफ्ते तक केवल 12% काम हुआ था, जो 14 जुलाई तक बढ़कर 16% हो गया। गया जिले के गुरुआ प्रखंड और पूर्णिया, मुंगेर और सारण जैसे इलाकों में बारिश के बाद काम काफी बढ़ा है। रोहतास में 20 जुलाई तक 60% रोपनी पूरी हो चुकी है, जबकि पश्चिमी चंपारण में 92% और किशनगंज में 90% काम पूरा हो गया है। हालांकि, आरा और जमुई जैसे कुछ जिलों में अभी भी लक्ष्य से काफी पीछे हैं।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि 20 जुलाई के बाद के 15 से 20 दिन धान की रोपनी के लिए सबसे सही समय हैं। कम बारिश वाले इलाकों जैसे बक्सर और दरभंगा के हायाघाट में विभाग ने किसानों को सीधी बोआई (direct seeding) करने की सलाह दी है। साथ ही, ICAR पटना ने ‘स्वर्ण पूर्वी धान 3’ नाम की नई किस्म विकसित की है, जो कम पानी में और 110-120 दिनों में तैयार हो जाती है।
सरकार ने किसानों की मदद के लिए कई योजनाएं चलाई हैं। मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत अब प्रति वर्ष 3000 रुपये की अतिरिक्त सहायता मिलेगी। भागलपुर के कुछ प्रखंडों में कृषि इनपुट अनुदान के तहत सिंचित और असिंचित जमीन के हिसाब से 8500 से 22500 रुपये तक की मदद दी जा रही है।
| विवरण | महत्वपूर्ण जानकारी |
|---|---|
| PMFBY बीमा पंजीकरण | 12 जुलाई से शुरू, अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 |
| कुल रोपनी लक्ष्य | 37.83 लाख हेक्टेयर |
| मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि | 3000 रुपये अतिरिक्त वार्षिक सहायता |
| नई धान किस्म | स्वर्ण पूर्वी धान 3 (ICAR पटना द्वारा विकसित) |