Bihar में नई टोल नीति लागू, स्टेट हाईवे और पुलों पर लगेगा टैक्स, प्राइवेट गाड़ियों को मिली छूट

Bihar: बिहार सरकार ने राज्य की सड़कों और पुलों के रखरखाव के लिए नई टोल नीति लागू कर दी है। 10 जुलाई 2026 से प्रभावी इस नियम के तहत अब स्टेट हाईवे और 250 मीटर से ज्यादा लंबे पुलों पर यूजर फीस वसूली जाएगी। इस नीति को बिहार

Bihar: बिहार सरकार ने राज्य की सड़कों और पुलों के रखरखाव के लिए नई टोल नीति लागू कर दी है। 10 जुलाई 2026 से प्रभावी इस नियम के तहत अब स्टेट हाईवे और 250 मीटर से ज्यादा लंबे पुलों पर यूजर फीस वसूली जाएगी। इस नीति को बिहार कैबिनेट ने 1 जुलाई को मंजूरी दी थी, जिसके बाद रोड कंस्ट्रक्शन डिपार्टमेंट ने 7 जुलाई को नोटिफिकेशन जारी किया।

इस नई व्यवस्था में टोल वसूली के लिए मुख्य रूप से FASTag या अन्य डिजिटल पेमेंट सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा। टोल की दरें सड़क की चौड़ाई के हिसाब से तय की गई हैं। फोर-लेन सड़कों पर पूरा टैक्स लगेगा, जबकि दो और चार लेन के बीच की सड़कों पर 60% और 5.5 मीटर चौड़ी सड़कों पर 50% टैक्स वसूला जाएगा। पुलों के मामले में टोल की गणना के लिए पुल की वास्तविक लंबाई का दस गुना हिस्सा कुल दूरी में जोड़कर टैक्स तय किया जाएगा।

आम लोगों के लिए राहत की बात यह है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया है कि यह टोल टैक्स केवल कमर्शियल वाहनों पर लगेगा और प्राइवेट गाड़ियां इसमें पूरी तरह छूट रखेंगी। इसके अलावा शहर की सीमा के अंदर आने वाली सड़कों और 5.5 मीटर से कम चौड़ी सड़कों पर कोई टैक्स नहीं देना होगा। टू-व्हीलर और खेती वाले ट्रैक्टरों को भी छूट दी गई है, हालांकि अगर मोटरसाइकिल के लिए कोई वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध है, तो उनसे कार की आधी दर से टैक्स लिया जा सकता है।

नियमों का पालन न करने वालों पर सख्ती बरती जाएगी। अगर कोई टोल नहीं देता है, तो उसे दोगुना जुर्माना भरना होगा। ई-नोटिस मिलने के 72 घंटे के भीतर बकाया राशि और जुर्माना न चुकाने पर वाहन के कागजात जैसे इंश्योरेंस, पॉल्यूशन सर्टिफिकेट और NOC ब्लॉक कर दिए जाएंगे, जिससे गाड़ी के ट्रांसफर या अपडेट की प्रक्रिया रुक जाएगी।

स्थानीय निवासियों के लिए सरकार ने 250 रुपये में मंथली अनलिमिटेड पास की सुविधा दी है। वहीं VIP और एडवोकेट जनरल जैसे पदों पर बैठे लोगों को टोल से छूट मिलेगी। अगर किसी वाहन मालिक को लगता है कि गलत नोटिस भेजा गया है, तो वह 72 घंटे के भीतर सरकारी पोर्टल पर ऑनलाइन आपत्ति दर्ज करा सकता है। अधिकारियों को 5 दिन के अंदर इस पर फैसला लेना होगा, वरना बकाया राशि अपने आप माफ कर दी जाएगी।