Bihar: नेपाल सरकार द्वारा भारत से आने वाले सामानों पर सख्त सीमा शुल्क नियम लागू करने से उत्तरी बिहार के बाजारों में कारोबार ठप हो गया है। रक्सौल, जयनगर और सीतामढ़ी जैसे बड़े व्यापारिक केंद्रों में नेपाली ग्राहकों की भीड़
Bihar: नेपाल सरकार द्वारा भारत से आने वाले सामानों पर सख्त सीमा शुल्क नियम लागू करने से उत्तरी बिहार के बाजारों में कारोबार ठप हो गया है। रक्सौल, जयनगर और सीतामढ़ी जैसे बड़े व्यापारिक केंद्रों में नेपाली ग्राहकों की भीड़ गायब है, जिससे स्थानीय व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है। सीमा पर सख्ती के कारण अब छोटे स्तर पर होने वाली खरीदारी भी मुश्किल हो गई है।
नेपाल सरकार ने क्या नए नियम लागू किए हैं?
नेपाल सरकार ने अब 100 रुपये से अधिक की किसी भी वस्तु के लिए औपचारिक सीमा शुल्क निकासी प्रक्रिया को अनिवार्य कर दिया है। सीमा शुल्क विभाग के महानिदेशक श्याम प्रसाद भंडारी के मुताबिक यह कोई नया नियम नहीं है, बल्कि पुराने कानूनों को अब सख्ती से लागू किया जा रहा है। इसके अलावा भारतीय नंबर प्लेट वाली निजी कारों के लिए भंसार पास अनिवार्य है और वे साल में केवल 30 दिन ही नेपाल में रह सकती हैं।
किन सामानों को ले जाने पर लगी रोक और क्या है असर?
नए नियमों के तहत भारत से कई दैनिक उपयोग की चीजों को नेपाल ले जाना प्रतिबंधित कर दिया गया है। इसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित वस्तुएं शामिल हैं:
- दालडा (खाना पकाने का वसा)
- पेय पदार्थ और दवाएं
- मांस, मछली और अचार
इस सख्ती का सीधा असर बिहार के कई जिलों के बाजारों पर पड़ा है, जिसकी जानकारी नीचे दी गई तालिका में है:
| प्रभावित क्षेत्र/संस्था |
नुकसान और प्रभाव |
| रक्सौल चैंबर ऑफ कॉमर्स |
10 से 12 करोड़ रुपये के कारोबार पर असर |
| प्रमुख बाजार |
जयनगर, सीतामढ़ी, भीम नगर, लौकही, हरलाखी, मधवापुर, अररिया |
| CAIT (व्यापारी संघ) |
खुदरा बाजार पूरी तरह समाप्त होने की आशंका |
| नेपाली उपभोक्ता |
दैनिक वस्तुओं की कीमतों में भारी बढ़ोतरी |
सीमा पर क्या है ताजा स्थिति?
21 अप्रैल 2026 की रिपोर्ट के अनुसार सीमा पर तनाव बना हुआ है। सप्तरी जिले के कुनौली बॉर्डर पर सुरक्षा बलों और स्थानीय लोगों के बीच झड़प की खबरें आई हैं। स्थानीय राजनीतिक दलों ने इन नियमों के खिलाफ संयुक्त बयान जारी किया है और आगे बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है। व्यापारियों का कहना है कि अगर यही स्थिति रही तो सीमावर्ती इलाकों की अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाएगी।