Bihar: नालंदा के अस्पताल से नवजात गायब होने पर पटना हाईकोर्ट सख्त, लाइसेंस रद्द करने के निर्देश
Bihar/Nalanda: बिहार शरीफ के नवजीवन शिशु अस्पताल से एक नवजात बच्चे के गायब होने और तस्करी की आशंका वाले मामले में पटना हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने पुलिस की जांच में हुई लापरवाही और अस्पताल के रिकॉर्ड में क
Bihar/Nalanda: बिहार शरीफ के नवजीवन शिशु अस्पताल से एक नवजात बच्चे के गायब होने और तस्करी की आशंका वाले मामले में पटना हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने पुलिस की जांच में हुई लापरवाही और अस्पताल के रिकॉर्ड में की गई गड़बड़ी पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने अब अस्पताल के खिलाफ कानून के तहत कड़ी कार्रवाई करने और जांच की रफ्तार बढ़ाने का आदेश दिया है।
यह पूरा मामला मार्च 2023 का है जब अविनाश कुमार के बेटे का जन्म हुआ था। पीड़ित पिता का आरोप है कि अस्पताल ने उनके बेटे की जगह उन्हें बेटी सौंप दी। जांच के दौरान यह बात सामने आई कि अस्पताल के रिकॉर्ड में बच्चे के लिंग (Gender) वाले कॉलम में ‘Male’ को काटकर ‘Female’ लिखा गया था। अस्पताल के प्रभारी डॉ. ब्रजेश कुमार ने खुद यह बात स्वीकार की कि उन्होंने प्रवेश के समय ‘FE’ जोड़ा था।
पटना हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद और न्यायमूर्ति रमेश चंद मालवीय की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने पाया कि अस्पताल के NICU वार्ड में न तो कोई सीसीटीवी कैमरा लगा था और न ही वहां कोई सुरक्षा गार्ड तैनात था। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने फैसले और केंद्रीय गृह मंत्रालय के जून 2026 के दिशानिर्देशों का जिक्र किया, जिसमें कहा गया है कि अगर किसी अस्पताल से नवजात गायब होता है, तो उसका लाइसेंस तुरंत रद्द कर देना चाहिए।
नालंदा पुलिस अधीक्षक की रिपोर्ट के बाद कोर्ट ने माना कि डॉ. ब्रजेश कुमार के खिलाफ आरोप सही लग रहे हैं। पुलिस प्रशासन ने आरोपी अस्पताल के खिलाफ कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई का प्रस्ताव भेजा है और जिलाधिकारी से सख्त कदम उठाने की उम्मीद की गई है। बच्चे की सही पहचान सुनिश्चित करने के लिए डीएनए जांच का भी निर्देश दिया गया है।