Bihar: मुजफ्फरपुर की मशहूर शाही लीची अब बाजारों में आने लगी है। 11 मई 2026 से बगीचों में तुड़ाई का काम तेज हो गया है और यह फल दिल्ली, लखनऊ और मुंबई जैसे बड़े शहरों के बाजारों तक पहुंच रहा है। मौसम की लुकाछिपी के बाद अब ल
Bihar: मुजफ्फरपुर की मशहूर शाही लीची अब बाजारों में आने लगी है। 11 मई 2026 से बगीचों में तुड़ाई का काम तेज हो गया है और यह फल दिल्ली, लखनऊ और मुंबई जैसे बड़े शहरों के बाजारों तक पहुंच रहा है। मौसम की लुकाछिपी के बाद अब लीची में लाली आ गई है, जिससे किसानों के चेहरे खिले हुए हैं।
शाही लीची की उपलब्धता और लीची एक्सप्रेस की तैयारी
शाही लीची अपनी पूरी मिठास और चरम अवस्था में 20 से 25 मई 2026 के बीच बाजार में उपलब्ध होगी। रेलवे ने भी इसकी ढुलाई के लिए खास तैयारी की है। मुजफ्फरपुर जंक्शन से मुंबई के लिए लीची एक्सप्रेस की बुकिंग 15 मई 2026 से शुरू होगी। इसमें पार्सल वैन की क्षमता बढ़ाई गई है और डिजिटल पेमेंट की सुविधा भी दी गई है।
QR कोड से होगी पहचान और कीटों से बचाव के इंतजाम
नकली शाही लीची की बिक्री रोकने के लिए अब पैकेट पर QR कोड या बारकोड लगाया जा रहा है। इससे ग्राहक लीची के बाग, किसान और उसकी क्वालिटी की जानकारी ले सकेंगे। वहीं, गंधी कीट (Stink Bug) के नुकसान का आकलन करने के लिए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देश पर एक टास्क फोर्स बनाई गई है, जो एक हफ्ते में अपनी रिपोर्ट देगी।
उत्पादन में कमी और कीमतों का असर
भीषण गर्मी और ओलावृष्टि की वजह से इस बार पैदावार कम रहने का अनुमान है। बिहार में कुल उत्पादन 3 लाख टन से घटकर 1 से 1.5 लाख टन रह सकता है। उत्पादन कम होने के कारण कीमतें बढ़ सकती हैं। पिछले साल यह 60 से 90 रुपये प्रति सैकड़ा थी, जो इस बार 90 से 150 रुपये तक जा सकती है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
शाही लीची की असली पहचान कैसे होगी?
अब शाही लीची के पैकेट पर QR कोड और बारकोड सिस्टम लागू किया जा रहा है। इससे उपभोक्ता लीची के बाग, किसान और कोल्ड चेन की पूरी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।
इस साल लीची की कीमतें क्यों बढ़ सकती हैं?
मौसम की मार, ओलावृष्टि और कीटों के प्रकोप के कारण उत्पादन में भारी कमी आई है। मुजफ्फरपुर में उत्पादन 60-70 हजार टन से घटकर 30-40 हजार टन रहने का अनुमान है।