Bihar: मुजफ्फरपुर की साइबर पुलिस ने एक ऐसे गिरोह को पकड़ा है जो लोगों को ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर लाखों रुपये ठग रहा था। इस गैंग ने एक रिटायर्ड बैंक कर्मचारी से 67 लाख रुपये ऐंठे। पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी
Bihar: मुजफ्फरपुर की साइबर पुलिस ने एक ऐसे गिरोह को पकड़ा है जो लोगों को ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर लाखों रुपये ठग रहा था। इस गैंग ने एक रिटायर्ड बैंक कर्मचारी से 67 लाख रुपये ऐंठे। पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी प्रियरंजन शर्मा और उसके बेटे अनंत अभिषेक समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है।
कैसे काम करता था यह डिजिटल अरेस्ट स्कैम
ठग पहले पीड़ित को व्हाट्सएप वीडियो कॉल करते थे और खुद को CBI, RBI या ED जैसी बड़ी एजेंसियों का अधिकारी बताते थे। वे पीड़ित को डराते थे कि उनके आधार या बैंक खाते का इस्तेमाल ड्रग तस्करी में हुआ है। इसके बाद उन्हें वीडियो कॉल पर ही निगरानी में रखा जाता था ताकि वे किसी को बता न सकें, जिसे ‘डिजिटल अरेस्ट’ कहा गया। आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट और आरबीआई के जाली दस्तावेज भी भेजे ताकि पीड़ित को सच लगे।
ठगी का शिकार हुए रिटायर्ड कर्मचारी की कहानी
मुजफ्फरपुर के आमगोला निवासी 66 वर्षीय रिटायर्ड बैंक कर्मचारी महेश गामी को 26 मार्च 2026 को कॉल आया। उन्हें 7 अप्रैल तक मानसिक दबाव में रखा गया और डराया गया। इस डर के कारण उन्होंने 4 और 6 अप्रैल को दो किस्तों में कुल 67 लाख रुपये ठगों के खातों में भेज दिए। बाद में 9 अप्रैल को उन्होंने साइबर थाने में इसकी शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस जांच में सामने आए चौंकाने वाले खुलासे
| विवरण |
जानकारी |
| मुख्य आरोपी |
प्रियरंजन शर्मा (रिटायर्ड सांख्यिकी अधिकारी) और बेटा |
| गिरफ्तारी का स्थान |
राजीव नगर, पटना |
| संदिग्ध लेनदेन |
लगभग 200 करोड़ रुपये (विदेशी लेनदेन) |
| नेटवर्क विस्तार |
देश के 28 राज्यों, चेन्नई और मुंबई तक फैला |
| बरामद सामान |
लैपटॉप, 19 चेकबुक, 3 मोबाइल, 4 मुहरें और नकदी |
एसएसपी कांतेश कुमार मिश्रा ने लोगों से अपील की है कि वे अपने बैंक खातों और दस्तावेजों की सुरक्षा का ध्यान रखें। साइबर डीएसपी हिमांशु कुमार ने बताया कि आरोपियों ने पैसे छिपाने के लिए फर्जी कंपनियां और एनजीओ के नाम पर खाते खोले थे।
Frequently Asked Questions (FAQs)
डिजिटल अरेस्ट क्या होता है और इससे कैसे बचें
इसमें ठग वीडियो कॉल के जरिए खुद को पुलिस या सरकारी अधिकारी बताकर पीड़ित को डराते हैं और उसे कॉल न काटने या किसी को न बताने के लिए मजबूर करते हैं। याद रखें कि कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर किसी को गिरफ्तार या ‘अरेस्ट’ नहीं करती है।
साइबर ठगी होने पर तुरंत क्या करना चाहिए
अगर आपके साथ ऐसी कोई धोखाधड़ी होती है, तो तुरंत अपने नजदीकी साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराएं या सरकारी हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करें ताकि समय रहते बैंक खातों को फ्रीज किया जा सके।