Bihar: बिहार सरकार ने राज्य के स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। अब MBBS डॉक्टरों को अल्ट्रासाउंड जांच की स्पेशल ट्रेनिंग दी जाएगी। इस कदम से खासकर गांव और छोटे शहरों में रहने वाले लोगों को फा
Bihar: बिहार सरकार ने राज्य के स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। अब MBBS डॉक्टरों को अल्ट्रासाउंड जांच की स्पेशल ट्रेनिंग दी जाएगी। इस कदम से खासकर गांव और छोटे शहरों में रहने वाले लोगों को फायदा होगा, क्योंकि वहां रेडियोलॉजिस्ट डॉक्टरों की काफी कमी रहती है।
ट्रेनिंग का तरीका और नियम क्या होंगे?
बिहार स्वास्थ्य विभाग के नए नियमों के मुताबिक, MBBS डॉक्टरों को 6 महीने का एक खास प्रोग्राम पूरा करना होगा। इस दौरान उन्हें कुल 300 घंटे की ट्रेनिंग दी जाएगी, जिसकी निगरानी रेडियोलॉजिस्ट और गाइनेकोलॉजिस्ट डॉक्टर करेंगे। ट्रेनिंग पूरी करने के बाद एक परीक्षा (CBA) होगी और पास होने वाले डॉक्टरों को सर्टिफिकेट मिलेगा। यह पूरी प्रक्रिया PCPNDT एक्ट 1994 के नियमों के तहत होगी ताकि किसी भी गलत इस्तेमाल को रोका जा सके।
किन अस्पतालों में मिलेगी ट्रेनिंग और क्या होगा फायदा?
इस ट्रेनिंग के लिए राज्य के मेडिकल कॉलेजों को सेंटर बनाया गया है। पटना के IGIMS में 36 सीटें और मुजफ्फरपुर के SKMCH में 4 सीटें तय की गई हैं। ट्रेनिंग के बाद ये डॉक्टर ‘लेवल वन एब्डोमिनो-पेल्विक अल्ट्रासोनोग्राफी’ कर सकेंगे। इससे मरीजों को जांच के लिए बड़े शहरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और समय पर इलाज मिल सकेगा। जो डॉक्टर पहले तीन बार परीक्षा में फेल हुए थे, उन्हें भी इस 6 महीने के कोर्स में शामिल होने का मौका मिलेगा।
इस पूरी योजना की निगरानी कौन करेगा?
इस पूरे काम को सही तरीके से लागू करने के लिए एक स्पेशल कमेटी बनाई गई है। इस कमेटी में स्वास्थ्य शिक्षा विभाग के बड़े अधिकारी, बिहार यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज के कुलपति और रेडियोलॉजी व गाइनेकोलॉजी विभाग के एक्सपर्ट्स शामिल हैं। सरकार ने इसके दिशा-निर्देश सभी मेडिकल कॉलेजों और जिला स्वास्थ्य अधिकारियों को भेज दिए हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
MBBS डॉक्टरों को अल्ट्रासाउंड के लिए कितनी ट्रेनिंग लेनी होगी?
डॉक्टरों को 6 महीने का कोर्स करना होगा, जिसमें कुल 300 घंटे की ट्रेनिंग शामिल है। इसके बाद उन्हें एक योग्यता परीक्षा (CBA) पास करनी होगी।
यह ट्रेनिंग किन अस्पतालों में उपलब्ध होगी?
यह ट्रेनिंग बिहार के मेडिकल कॉलेजों में होगी, जिसमें पटना के IGIMS (36 सीटें) और मुजफ्फरपुर के SKMCH (4 सीटें) मुख्य केंद्र हैं।