Bihar: राज्य के किसानों के लिए अच्छी खबर है। अब मखाना उगाने के लिए सिर्फ तालाबों पर निर्भर नहीं रहना होगा, बल्कि जलजमाव वाले खेतों को भी मखाना उत्पादन के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा। बिहार सरकार ‘मखाना विकास योजना&#
Bihar: राज्य के किसानों के लिए अच्छी खबर है। अब मखाना उगाने के लिए सिर्फ तालाबों पर निर्भर नहीं रहना होगा, बल्कि जलजमाव वाले खेतों को भी मखाना उत्पादन के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा। बिहार सरकार ‘मखाना विकास योजना’ के जरिए किसानों को खेती से लेकर निर्यात तक की पूरी प्रक्रिया में भारी आर्थिक मदद दे रही है, जिससे अनुपयोगी जमीन अब कमाई का जरिया बनेगी।
मखाना खेती पर कितनी मिलेगी आर्थिक मदद
सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए योजना शुरू की है। इसके तहत किसानों को मखाना की खेती शुरू करने के लिए प्रति हेक्टेयर 71,600 रुपये तक की वित्तीय सहायता मिलेगी। इसके अलावा, खेती के लिए जरूरी टूल किट खरीदने के लिए 16,575 रुपये का अनुदान दिया जाएगा। प्रोसेसिंग यूनिट लगाने वालों के लिए भी अलग-अलग स्तर पर 5 लाख से लेकर 3.5 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी का प्रावधान है।
किन जिलों के किसान उठा सकते हैं लाभ
यह योजना अब बिहार के 16 जिलों में लागू कर दी गई है। इसमें दरभंगा, मधुबनी, सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, अररिया, किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार, खगड़िया, समस्तीपुर, भागलपुर, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, पूर्वी चंपारण और पश्चिमी चंपारण शामिल हैं। भोजपुर जिले में करीब 7000 एकड़ जलजमाव वाली जमीन पर मखाना उगाने के लिए 75% अनुदान दिया जा रहा है।
आवेदन कैसे करें और कौन है पात्र
इस योजना का लाभ जमीन के मालिक और किराये पर खेती करने वाले दोनों तरह के किसान उठा सकते हैं। आवेदन करने के लिए किसानों को बिहार कृषि ऐप या उद्यान निदेशालय की वेबसाइट (horticulture.bihar.gov.in) पर ऑनलाइन फॉर्म भरना होगा। सरकार ने इसमें 30% महिला किसानों की भागीदारी तय की है और सारा पैसा डीबीटी के जरिए सीधे बैंक खाते में भेजा जाएगा। खेती के लिए ‘सबौर मखाना-1’ जैसी उन्नत किस्म के बीजों के इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
मखाना खेती के लिए आवेदन कैसे करें?
किसान बिहार कृषि ऐप या उद्यान निदेशालय की आधिकारिक वेबसाइट horticulture.bihar.gov.in के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
क्या किराये की जमीन पर खेती करने वाले किसान आवेदन कर सकते हैं?
हाँ, गैर-रैयत यानी किरायेदार किसान भी एकरारनामा (समझौता) के आधार पर इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।