Bihar : बिहार में शराबबंदी कानून को लेकर एक बार फिर राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है। पटना में मुख्यमंत्री Samrat Choudhary के सरकारी आवास के पास प्रतिबंधित शराब की खाली बोतलें मिली हैं। यह घटना शुक्रवार, 22 मई 2026 को हुई
Bihar : बिहार में शराबबंदी कानून को लेकर एक बार फिर राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है। पटना में मुख्यमंत्री Samrat Choudhary के सरकारी आवास के पास प्रतिबंधित शराब की खाली बोतलें मिली हैं। यह घटना शुक्रवार, 22 मई 2026 को हुई, जिसने हाई-सिक्योरिटी जोन की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
CM हाउस के पास बोतलें मिलने से क्या हुआ बवाल
मुख्यमंत्री के आवास (5 देश रत्न मार्ग) से करीब 100 मीटर की दूरी पर शराब की बोतलें मिलीं। पुलिस अब CCTV फुटेज खंगाल रही है ताकि पता चल सके कि ये बोतलें वहां कैसे पहुंचीं। इससे पहले भी सचिवालय और विधानसभा परिसर के पास ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं। RJD नेता Rohini Acharya ने इस पर सरकार को घेरते हुए कहा कि यह शराबबंदी की विफलता है और अवैध शराब का कारोबार राजनीतिक संरक्षण में फल-फूल रहा है।
शराबबंदी कानून और अब तक की कार्रवाई
बिहार में 5 अप्रैल 2016 से पूर्ण शराबबंदी लागू है। इस कानून का मकसद घरेलू हिंसा कम करना और समाज में सुधार लाना था। दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों के मुताबिक, इस कानून के तहत 12 लाख से ज्यादा गिरफ्तारियां हुई हैं और 8.5 लाख केस दर्ज किए गए हैं। पुलिस ने करीब 1.2 लाख गाड़ियां भी जब्त की हैं, जिनकी नीलामी से 327 करोड़ रुपये मिले हैं।
क्या अब हटेगा बिहार से शराबबंदी कानून
विपक्ष के साथ-साथ NDA के कुछ सहयोगी जैसे RLM के माधव आनंद, JDU के अनंत सिंह और HAM(S) प्रमुख जीतन राम मांझी ने भी इस कानून की समीक्षा करने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे राज्य को सालाना 3,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है और गरीब लोग ज्यादा परेशान हैं। हालांकि, मुख्यमंत्री Samrat Choudhary और कैबिनेट मंत्री Vijay Kumar Chaudhary ने साफ कर दिया है कि शराबबंदी कानून जारी रहेगा और इसे हटाने का कोई विचार नहीं है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
बिहार में शराबबंदी कानून कब लागू हुआ था?
बिहार में पूर्ण शराबबंदी 5 अप्रैल 2016 को लागू की गई थी। इसके बाद 2018, 2022 और 2023 में इसमें कई संशोधन किए गए ताकि सजा और जुर्माने के नियमों को बदला जा सके।
शराबबंदी के खिलाफ कौन से नेता आवाज उठा रहे हैं?
RJD के अलावा NDA के सहयोगी दलों के नेता जैसे माधव आनंद (RLM), अनंत सिंह (JDU) और जीतन राम मांझी (HAM-S) ने कानून की समीक्षा और इसे हटाने की मांग की है।