Bihar: बिहार के रेल यात्रियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। केंद्र सरकार ने हावड़ा-दिल्ली कॉरिडोर पर किऊल-झाझा तीसरी लाइन परियोजना को मंजूरी दे दी है। इस प्रोजेक्ट पर लगभग 962 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जिससे ट्रेनों की आ
Bihar: बिहार के रेल यात्रियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। केंद्र सरकार ने हावड़ा-दिल्ली कॉरिडोर पर किऊल-झाझा तीसरी लाइन परियोजना को मंजूरी दे दी है। इस प्रोजेक्ट पर लगभग 962 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जिससे ट्रेनों की आवाजाही आसान होगी और सफर के दौरान होने वाली देरी में कमी आएगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस फैसले के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का शुक्रिया अदा किया है।
परियोजना की लागत और काम का विवरण क्या है?
यह प्रोजेक्ट 54 किलोमीटर लंबा होगा। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पत्र के जरिए इसकी जानकारी दी है। इस पूरी परियोजना का बजट 961.71 करोड़ रुपये तय किया गया है, जिसे अलग-अलग हिस्सों में बांटा गया है।
| काम का विवरण |
अनुमानित लागत (करोड़ रुपये में) |
| रेलवे ट्रैक और फ्लाईओवर |
663.04 |
| सिग्नलिंग और दूरसंचार |
221.63 |
| इलेक्ट्रिक और ट्रैक्शन |
76 |
इस तीसरी लाइन से आम यात्रियों और व्यापार को क्या फायदा होगा?
किऊल और झाझा के बीच अभी दोहरी लाइन है, लेकिन ट्रैफिक बहुत ज्यादा होने के कारण ट्रेनें अक्सर लेट होती हैं। तीसरी लाइन बनने से ट्रेनों के परिचालन में लचीलापन आएगा और समय की बचत होगी। इससे न केवल यात्री ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी, बल्कि मालगाड़ियों की आवाजाही भी बेहतर होगी, जिससे इलाके में व्यापार और औद्योगिक विकास को मजबूती मिलेगी।
यह प्रोजेक्ट किस बड़े प्लान का हिस्सा है?
यह काम डीडीयू-झाझा परियोजना का एक हिस्सा है। इस बड़े प्रोजेक्ट के तहत उत्तर प्रदेश के दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन से लेकर बिहार के झाझा स्टेशन तक तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाई जा रही है। इस पूरे बड़े प्रोजेक्ट की कुल लागत लगभग 17,000 करोड़ रुपये है, जिससे पूर्वी और उत्तरी भारत के बीच रेल संपर्क काफी मजबूत हो जाएगा।
Frequently Asked Questions (FAQs)
किऊल-झाझा तीसरी लाइन परियोजना की कुल लंबाई और लागत कितनी है?
इस परियोजना की कुल लंबाई 54 किलोमीटर है और इसकी अनुमानित लागत 961.71 करोड़ रुपये है।
इस प्रोजेक्ट से बिहार के लोगों को क्या लाभ मिलेगा?
इससे हावड़ा-दिल्ली रूट पर ट्रेनों की क्षमता बढ़ेगी, समयबद्धता में सुधार होगा और माल ढुलाई आसान होने से स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।