Bihar: किशनगंज जिले के ठाकुरगंज प्रखंड में प्रशासन और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक 16 साल की नाबालिग लड़की की शादी रुकवा दी। यह मामला खारूदह पंचायत का है, जहां बारात दरवाजे तक पहुंच चुकी थी, लेकिन समय रहते टीम ने मौके पर प
Bihar: किशनगंज जिले के ठाकुरगंज प्रखंड में प्रशासन और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक 16 साल की नाबालिग लड़की की शादी रुकवा दी। यह मामला खारूदह पंचायत का है, जहां बारात दरवाजे तक पहुंच चुकी थी, लेकिन समय रहते टीम ने मौके पर पहुंचकर इस बाल विवाह को स्थगित करवा दिया।
शादी कैसे रुकी और प्रशासन ने क्या किया
प्रशासन और जन निर्माण केंद्र (NGO) को सूचना मिली थी कि एक नाबालिग लड़की की शादी की जा रही है। खबर मिलते ही अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) और प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) पुलिस बल और जिला बाल संरक्षण इकाई के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने परिवार के लोगों को बाल विवाह के कानूनी प्रावधानों और इससे होने वाले नुकसान के बारे में समझाया, जिसके बाद परिवार ने शादी टालने का फैसला किया और लिखित आश्वासन दिया कि बेटी की उम्र 18 साल होने के बाद ही उसकी शादी होगी।
बाल विवाह कानून और सजा के प्रावधान
बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की और 21 वर्ष से कम उम्र के लड़के की शादी कानूनी अपराध है। इस कानून के तहत शादी करने, करवाने या इसमें मदद करने वालों को दो साल तक की जेल और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। बिहार बाल विवाह प्रतिषेध नियमावली 2010 के तहत SDO को बाल विवाह निषेध पदाधिकारी और BDO को सहायक बाल विवाह निषेध पदाधिकारी बनाया गया है ताकि ऐसे मामलों पर लगाम लगाई जा सके।
बाल विवाह का बच्चों पर असर
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि नाबालिग की शादी करवाना एक गैर-जमानती अपराध है। इससे बच्चों के शिक्षा के अधिकार छिन जाते हैं और उनके शारीरिक व मानसिक विकास पर बुरा असर पड़ता है। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि समाज में इस कुप्रथा को खत्म करने के लिए लगातार निगरानी रखी जाएगी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
बाल विवाह रोकने के लिए कौन से कानून लागू हैं?
भारत में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 लागू है। इसके तहत 18 साल से कम लड़की और 21 साल से कम लड़के की शादी दंडनीय अपराध है, जिसमें 2 साल की जेल और 1 लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान है।
किशनगंज की इस घटना में किन अधिकारियों ने कार्रवाई की?
इस कार्रवाई में अनुमंडल पदाधिकारी (SDO), प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO), पुलिस प्रशासन, जिला बाल संरक्षण इकाई और बाल कल्याण समिति ने मिलकर काम किया।