Bihar के कैमूर जिले के मोहनिया इलाके में भीषण आग लगने से किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया है। बधार के पसपिपरा गांव में अचानक लगी इस आग ने देखते ही देखते 12 बीघा गेहूं की फसल को जलाकर राख कर दिया। तेज हवाओं की वजह से आग इ
Bihar के कैमूर जिले के मोहनिया इलाके में भीषण आग लगने से किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया है। बधार के पसपिपरा गांव में अचानक लगी इस आग ने देखते ही देखते 12 बीघा गेहूं की फसल को जलाकर राख कर दिया। तेज हवाओं की वजह से आग इतनी तेजी से फैली कि इसने आसपास के दादर और सुखपुरवा गांवों तक अपनी चपेट में ले लिया।
आग कैसे फैली और कितना हुआ नुकसान
जानकारी के मुताबिक आग की शुरुआत दुर्गाशंकर तिवारी के खेत से हुई थी। उस समय हवा काफी तेज चल रही थी, जिससे लपटें तेजी से दूसरे खेतों की तरफ बढ़ने लगीं। इस हादसे में न केवल गेहूं की फसल जली, बल्कि किसानों की जमा की हुई कुट्टी और पुआल भी पूरी तरह नष्ट हो गए। घटना के बाद ग्रामीणों में काफी हड़कंप मच गया और लोग अपनी फसल बचाने की कोशिश करने लगे।
दमकल विभाग और ग्रामीणों ने कैसे पाया काबू
आग की खबर मिलते ही दमकल की टीम मौके पर पहुंची और ग्रामीणों के साथ मिलकर आग बुझाने के काम में जुट गई। सबकी कोशिशों के बाद आग पर काबू पाया जा सका, जिससे आगे और ज्यादा नुकसान होने से बच गया। कैमूर के विनोद कुमार सिंह ने इस घटना की रिपोर्ट दी है।
फसल नुकसान पर मुआवजे का क्या है नियम
बिहार में फसल नुकसान को लेकर प्रशासन की कुछ व्यवस्थाएं हैं, जिन्हें अन्य जिलों के उदाहरण से समझा जा सकता है। आमतौर पर फसल नुकसान के लिए राजस्व अधिकारियों द्वारा मौके पर जांच की जाती है और वेरिफिकेशन के बाद मुआवजा किसानों के बैंक खाते में भेजा जाता है।
- नलांदा जैसे जिलों में फसल नुकसान पर 17,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की सहायता का प्रावधान देखा गया है।
- अगर आग से झोपड़ी या घर का सामान जलता है, तो उसके लिए अलग से आर्थिक मदद दी जाती है।
- कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि ट्रांसफार्मर के आसपास 10×10 फीट की जगह खाली रखें ताकि बिजली स्पार्किंग से आग न लगे।