Bihar: जमुई जिले के सिकंदरा नगर पंचायत में भ्रष्टाचार का बड़ा मामला सामने आया है। निगरानी विभाग (SVU) ने मंगलवार, 28 अप्रैल 2026 को एक बड़ी कार्रवाई करते हुए कार्यपालक पदाधिकारी संतोष कुमार और स्वच्छता साथी सोनू कुमार को
Bihar: जमुई जिले के सिकंदरा नगर पंचायत में भ्रष्टाचार का बड़ा मामला सामने आया है। निगरानी विभाग (SVU) ने मंगलवार, 28 अप्रैल 2026 को एक बड़ी कार्रवाई करते हुए कार्यपालक पदाधिकारी संतोष कुमार और स्वच्छता साथी सोनू कुमार को 50,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया। यह पूरी कार्रवाई पटना की विशेष निगरानी इकाई द्वारा की गई।
रिश्वत क्यों मांगी जा रही थी और किसने की शिकायत
यह पूरा मामला प्रधानमंत्री आवास योजना (Pradhan Mantri Awas Yojana) से जुड़ा है। वार्ड संख्या 03 के पार्षद राजेश कुमार मिश्रा ने शिकायत की थी कि 65 लाभार्थियों को आवास की स्वीकृति दिलाने के बदले में रिश्वत मांगी जा रही है। प्रति फाइल 2,500 रुपये की दर से कुल 1,62,500 रुपये की मांग की गई थी, जिसमें से 50,000 रुपये लेते समय अधिकारियों को पकड़ा गया।
गिरफ्तार अधिकारियों के बारे में क्या जानकारी मिली
पकड़े गए कार्यपालक पदाधिकारी संतोष कुमार 67वें बैच के बीपीएससी अधिकारी हैं। वह सितंबर 2025 में पूर्णिया जिले के अमौर नगर पंचायत से ट्रांसफर होकर सिकंदरा आए थे। उनके साथ स्वच्छता साथी सोनू कुमार को भी गिरफ्तार किया गया है। दोनों को पहले सिकंदरा थाना ले जाया गया और अब उन्हें पटना स्थित विशेष निगरानी न्यायालय में पेश किया जाएगा।
भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत क्या होगी कार्रवाई
विशेष निगरानी इकाई ने शिकायतकर्ता की लिखित शिकायत के आधार पर भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 7 (Section 7 of the Prevention of Corruption Act) के तहत मामला दर्ज किया है। विभाग अब संतोष कुमार के कार्यालय और अन्य ठिकानों पर छापेमारी कर सबूत जुटा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के बाद इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
सिकंदरा नगर पंचायत में किन अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया है?
निगरानी विभाग ने कार्यपालक पदाधिकारी संतोष कुमार और स्वच्छता साथी सोनू कुमार को 50,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है।
रिश्वत की मांग किस योजना के लिए की जा रही थी?
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 65 लाभार्थियों को आवास की स्वीकृति दिलाने के लिए प्रति फाइल 2,500 रुपये की दर से रिश्वत मांगी जा रही थी।