Bihar: भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में मानवाधिकार आयोग सख्त, पीड़ित परिवार को मुआवजा देने का आदेश
Bihar/Bhojpur: भोजपुर जिले के चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने बिहार सरकार को आदेश दिया है कि मृतक के आश्रितों को जल्द से जल्द अनुग्रह राशि यानी मुआवजे
Bihar/Bhojpur: भोजपुर जिले के चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने बिहार सरकार को आदेश दिया है कि मृतक के आश्रितों को जल्द से जल्द अनुग्रह राशि यानी मुआवजे का भुगतान किया जाए। यह मामला पुलिस की कार्यशैली और कथित फर्जी एनकाउंटर को लेकर काफी समय से चर्चा में है।
3 जुलाई को हुई सुनवाई के दौरान बिहार सरकार की तरफ से एडीजी लॉ एंड ऑर्डर पेश हुए। उन्होंने मामले की रिपोर्ट दाखिल करने के लिए आयोग से दो हफ्ते का और समय मांगा। आयोग ने समय तो बढ़ा दिया लेकिन साथ ही यह निर्देश भी दिया कि रिपोर्ट का इंतजार किए बिना पीड़ित परिवार को तुरंत वित्तीय राहत दी जाए। मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 18(सी) के तहत इस अंतरिम राहत की सिफारिश की गई है।
यह पूरी कानूनी लड़ाई मानवाधिकार अधिवक्ता एस.के. झा की याचिका पर चल रही है। उन्होंने दलील दी कि पीड़ित परिवार को न्याय मिलना चाहिए और जिन पुलिसकर्मियों ने कानून तोड़ा है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। आयोग ने इस घटना को बेहद दुखद बताया और कहा कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से साफ है कि मौत ज्यादा खून बहने और गोली लगने के सदमे से हुई है।
यह मामला जून 2026 का है जब शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव के रहने वाले 28 वर्षीय छात्र और सामाजिक कार्यकर्ता भरत भूषण तिवारी की पुलिस और एसटीएफ की एक कथित मुठभेड़ में मौत हो गई थी। पुलिस का दावा था कि भरत हवा में फायरिंग कर रहे थे और आत्मरक्षा में गोली चलाई गई। इस मामले में लापरवाही के आरोप में थानेदार समेत चार पुलिसकर्मी पहले ही निलंबित किए जा चुके हैं। आयोग ने अब अगली सुनवाई के लिए 3 अगस्त की तारीख तय की है।