Bihar में जमीन अधिग्रहण पर बड़ा फैसला, एक मौजा के सभी मालिकों को मिलेगा एक समान मुआवजा
Bihar: सम्राट चौधरी सरकार ने जमीन मालिकों के लिए एक बड़ा और राहत भरा प्लान तैयार किया है। अब राज्य में जमीन अधिग्रहण के दौरान एक ही मौजा यानी राजस्व ग्राम के सभी भू-स्वामियों को एक समान मुआवजा दिया जाएगा। इस फैसले से उन
Bihar: सम्राट चौधरी सरकार ने जमीन मालिकों के लिए एक बड़ा और राहत भरा प्लान तैयार किया है। अब राज्य में जमीन अधिग्रहण के दौरान एक ही मौजा यानी राजस्व ग्राम के सभी भू-स्वामियों को एक समान मुआवजा दिया जाएगा। इस फैसले से उन विवादों पर लगाम लगेगी जो मुआवजे की अलग-अलग दरों की वजह से पैदा होते थे।
पहले की व्यवस्था में सड़क या शहर के मुख्यालय से दूरी के हिसाब से मुआवजे की दरें तय होती थीं। इस वजह से एक ही गांव या मौजा के अलग-अलग हिस्सों में जमीन देने वालों को अलग-अलग पैसा मिलता था, जिससे लोगों में काफी नाराजगी रहती थी। अब राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग जल्द ही इस संबंध में आधिकारिक पत्र जारी करेगा, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी हो जाएगी।
इसके साथ ही सरकार ने 27 मई 2026 को ‘बिहार रैयती भूमि क्रय नीति, 2026’ को भी मंजूरी दे दी है। इस नई नीति का मकसद लोकहित के प्रोजेक्ट्स के लिए जमीन लेने की प्रक्रिया को आसान बनाना है। मुआवजे की दरों को लेकर सरकार ने स्पष्ट नियम बनाए हैं:
| क्षेत्र | मुआवजा दर |
|---|---|
| शहरी क्षेत्र | बाजार मूल्य या सर्किल दर (MVR) का दोगुना (जो भी अधिक हो) |
| ग्रामीण क्षेत्र | बाजार मूल्य या सर्किल दर का चार गुना (जो भी अधिक हो) |
| अतिरिक्त लाभ | 10% प्रोत्साहन राशि अलग से दी जाएगी |
सरकार ने यह भी तय किया है कि सरकारी खरीद वाली जमीन पर स्टांप और पंजीयन शुल्क नहीं लगेगा। अगर कोई परिवार किसी बड़ी परेशानी जैसे बेटी की शादी या आपदा के समय टाउनशिप के लिए जमीन दे रहा है, तो वे जिलाधिकारी को आवेदन कर सकते हैं। जांच के बाद उन्हें 15 दिनों के भीतर चार गुना मुआवजा सीधे खाते में मिल जाएगा।
सैटेलाइट टाउनशिप के लिए जमीन बेचने की प्रक्रिया को भी सरल किया गया है। अब इच्छुक लोग केवल बिहार राज्य आवास बोर्ड के ‘समाधान केंद्र’ में आवेदन कर सकते हैं। 100 करोड़ रुपये से कम मूल्य वाले प्रस्ताव जिलाधिकारी और इससे अधिक वाले प्रस्ताव प्रमंडलीय आयुक्त द्वारा मंजूर किए जाएंगे।
भूमि अधिग्रहण के नियमों में एक और बड़ा बदलाव यह है कि अब वास्तविक कब्जे को प्राथमिकता दी जाएगी, बशर्ते वह व्यक्ति अतिक्रमणकारी न हो। बिहार में फिलहाल विभिन्न प्रोजेक्ट्स के लिए करीब 45,000 एकड़ जमीन अधिग्रहित की जा रही है, जिस पर लगभग 30,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसमें उद्योग विभाग की भूमिका सबसे अहम है जो 24 जिलों में जमीन अधिग्रहण का काम देख रहा है।