Bihar : राज्य सरकार ने गन्ना किसानों की आमदनी बढ़ाने और चीनी उद्योग को पटरी पर लाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री के सात निश्चय-3 अभियान के तहत राज्य में 25 नई चीनी मिलें लगाने और 9 बंद पड़ी मिलों को फिर से शुरू
Bihar : राज्य सरकार ने गन्ना किसानों की आमदनी बढ़ाने और चीनी उद्योग को पटरी पर लाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री के सात निश्चय-3 अभियान के तहत राज्य में 25 नई चीनी मिलें लगाने और 9 बंद पड़ी मिलों को फिर से शुरू करने की तैयारी है। इसके लिए गन्ना उद्योग विभाग ने जिलाधिकारियों को जमीन चिन्हित करने के सख्त निर्देश दिए हैं।
नई चीनी मिलों के लिए जमीन की क्या है तैयारी
गन्ना उद्योग विभाग ने उन जिलाधिकारियों को पत्र भेजा है जिन्होंने अभी तक मिलों के लिए जमीन का प्रस्ताव नहीं भेजा है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि एक आधुनिक चीनी मिल लगाने के लिए कम से कम 100 एकड़ जमीन की जरूरत होगी। मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली एक हाई लेवल कमेटी इस पूरे प्रोजेक्ट की निगरानी कर रही है ताकि काम में देरी न हो।
चीनी मिलों को राहत और नियमों में बदलाव
सरकार ने आर्थिक तंगी से जूझ रही मिलों की मदद के लिए क्षेत्रीय विकास परिषद (JDC) के कमीशन में 90% की कटौती की है। अब यह कमीशन 1.80% से घटकर केवल 0.2% रह गया है, जो 2025-26 पेराई सत्र से लागू होगा। साथ ही, बंद मिलों को निजी कंपनियों के जरिए चलाने के लिए बिहार चीनी उपक्रम (अर्जन) अधिनियम 1985 की धारा-3 में संशोधन को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है।
सहकारी मिलों और तकनीक पर जोर
बिहार सहकारिता विभाग और NFCSF नई दिल्ली के बीच सकरी और रैयाम में नई सहकारी चीनी मिलें लगाने के लिए समझौता (MoU) हुआ है। इन मिलों में AI तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा ताकि गन्ना उत्पादन बढ़ सके और किसानों को बेहतर सुविधा मिले। गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार ने बताया कि बंद मिलों का पुनरुद्धार और नई मिलों की स्थापना से क्षेत्र के किसानों को अपनी फसल बेचने में आसानी होगी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
बिहार में कितनी नई चीनी मिलें लगेंगी और कितनी पुरानी चालू होंगी
राज्य सरकार सात निश्चय-3 के तहत 25 नई चीनी मिलें स्थापित करेगी और 9 बंद पड़ी चीनी मिलों को फिर से चालू करने का लक्ष्य लेकर चल रही है।
चीनी मिलों के लिए कितनी जमीन की आवश्यकता है
गन्ना उद्योग विभाग के अनुसार, एक आधुनिक चीनी मिल की स्थापना के लिए कम से कम 100 एकड़ जमीन की आवश्यकता होगी, जिसके लिए जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं।