Bihar में जमीन-मकान रजिस्ट्री की प्रक्रिया को सरल करने जा रही सरकार, शुरू हुआ पेपरलेस सिस्टम
Bihar: बिहार सरकार ने जमीन और संपत्ति की रजिस्ट्री को आसान बनाने के लिए पेपरलेस प्रणाली की शुरुआत की है। इस कदम का मकसद रजिस्ट्री की प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और सुविधाजनक बनाना है ताकि आम लोगों को दफ्तरों के चक्कर न का
Bihar: बिहार सरकार ने जमीन और संपत्ति की रजिस्ट्री को आसान बनाने के लिए पेपरलेस प्रणाली की शुरुआत की है। इस कदम का मकसद रजिस्ट्री की प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और सुविधाजनक बनाना है ताकि आम लोगों को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 11 जुलाई 2026 को हाजीपुर जिला निबंधन कार्यालय में इस डिजिटल सिस्टम का उद्घाटन किया।
सरकार का लक्ष्य है कि अगस्त 2026 तक बिहार के सभी 145 निबंधन कार्यालयों में इस पेपरलेस व्यवस्था को पूरी तरह लागू कर दिया जाए। 18 जुलाई 2026 से राज्य के नौ अन्य कार्यालयों में भी इसे शुरू किया जा रहा है। यह पूरी व्यवस्था ‘बिहार निबंधन नियमावली 2026’ और ‘बिहार स्टांप सेवा प्रदाता अनुज्ञप्ति एवं ई-स्टांप आपूर्ति नियमावली 2026’ के तहत काम करेगी। अब दस्तावेजों की तैयारी से लेकर सत्यापन और रजिस्ट्री तक का सारा काम ऑनलाइन होगा।
| प्रमुख नियम | विवरण |
|---|---|
| सत्यापन | आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य, पेन वाले हस्ताक्षर मान्य नहीं होंगे |
| भुगतान | स्टांप शुल्क और निबंधन शुल्क का भुगतान केवल ऑनलाइन होगा, नकद लेनदेन बंद |
| डिजिटल साइन | खरीदार, विक्रेता और अधिकारियों के डिजिटल हस्ताक्षर से रजिस्ट्री पूरी होगी |
| वरिष्ठ नागरिक | 80 वर्ष से अधिक उम्र वालों के लिए अधिकारी घर जाकर बायोमेट्रिक सत्यापन करेंगे |
| ई-निबंधन | जिन दफ्तरों में सिस्टम नहीं आया, वहां पोर्टल पर दस्तावेज अपलोड कर स्लॉट बुक कर सकते हैं |
इस नई व्यवस्था को लागू करने की जिम्मेदारी मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग की है। इसमें दस्तावेज नवीस (कातिब), स्टांप वेंडर और अधिवक्ता ऑनलाइन डेटा एंट्री और ई-फाइलिंग जैसे कामों में मदद करेंगे। विभाग के कर्मचारियों को इस नई तकनीक के लिए विशेष ट्रेनिंग भी दी जा रही है।
हालांकि, इस बदलाव से कुछ लोग नाराज भी हैं। दस्तावेज नवीसों और स्टांप वेंडरों को डर है कि डिजिटल सिस्टम आने से उनकी रोजी-रोटी छिन जाएगी और बेरोजगारी बढ़ेगी। बिहार दस्तावेज नवीस संघ और स्टांप वेंडरों का संघ इस नीति का विरोध कर रहा है और मामला अदालत ले जाने की तैयारी में है। जनवरी 2025 में भी इस मुद्दे पर हड़ताल हुई थी और फुलवारीशरीफ समेत कई इलाकों में विरोध देखा गया। वहीं शेखपुरा जैसे कुछ जिलों में अधिकारियों ने कहा है कि यह प्रणाली तुरंत लागू नहीं होगी।