Bihar : खान सर और रौशन सर के बीच हुए विवाद के बाद बिहार सरकार ने कोचिंग संस्थानों पर नकेल कसने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 9 जून 2026 को नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं ताकि छात्रों की पढ़ाई और सुरक्षा सुन
Bihar : खान सर और रौशन सर के बीच हुए विवाद के बाद बिहार सरकार ने कोचिंग संस्थानों पर नकेल कसने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 9 जून 2026 को नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं ताकि छात्रों की पढ़ाई और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। सरकार अब कोचिंग सेंटरों के संचालन और उनके विज्ञापनों पर कड़ी नजर रखेगी।
कोचिंग सेंटरों के लिए क्या हैं नए नियम और पाबंदियां?
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने साफ किया है कि अब सभी कोचिंग संस्थानों को अपने छात्रों की पूरी जानकारी जिला प्रशासन को देनी होगी। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि स्कूल और कॉलेज के समय के दौरान कोई भी कोचिंग क्लास नहीं चलेगी। यह नियम उन छात्रों पर लागू नहीं होगा जिन्होंने अपनी रेगुलर पढ़ाई पूरी कर ली है। शिक्षा विभाग अब एक नई और मजबूत नियमावली तैयार कर रहा है ताकि अनुशासन बना रहे।
पंजीकरण और सुविधाओं को लेकर क्या होगा नया सिस्टम?
शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने बताया कि अगले तीन महीने में एक नई कोचिंग नीति का मसौदा तैयार होगा। इसके तहत ‘बिहार कोचिंग संस्थान (नियंत्रण एवं विनियमन) प्राधिकरण’ बनाया जाएगा। सभी कोचिंग संस्थानों को 3 महीने के भीतर पंजीकरण कराना होगा, जिसकी फीस 15,000 रुपये होगी और यह 3 साल के लिए मान्य होगी। बिना रजिस्ट्रेशन कोचिंग चलाने वालों पर 1 लाख रुपये तक का जुर्माना लग सकता है।
संस्थानों में किन बुनियादी सुविधाओं का होना है जरूरी?
- प्रत्येक छात्र के लिए पर्याप्त जगह और शुद्ध पेयजल की व्यवस्था।
- अग्निशमन प्रमाणपत्र (Fire Safety) और सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य।
- अलग शौचालय और दिव्यांग छात्रों के लिए विशेष व्यवस्था।
- शिक्षकों के लिए न्यूनतम स्नातक डिग्री और पुलिस वेरिफिकेशन जरूरी।
- भ्रामक विज्ञापनों और सफलता की गारंटी जैसे दावों पर पूरी तरह रोक।
Frequently Asked Questions (FAQs)
पटना में कोचिंग बंद होने का समय क्या रहेगा?
पटना के लिए 22 जून से स्कूल के समय यानी सुबह 9:30 बजे से शाम 4 बजे तक कोचिंग चलाने पर प्रतिबंध रहेगा।
कोचिंग रजिस्ट्रेशन न कराने पर क्या कार्रवाई होगी?
प्रस्तावित कानून के तहत सभी संस्थानों को 3 महीने में पंजीकरण कराना होगा, ऐसा न करने पर 1 लाख रुपये तक का जुर्माना लग सकता है और संस्थान को बंद भी किया जा सकता है।