Bihar: बिहार सरकार ने सरकारी खजाने के इस्तेमाल में अनुशासन लाने के लिए एक नया सिस्टम लागू किया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अब सभी सरकारी विभागों को एक तय लिमिट के अंदर ही योजना मद की राशि खर्च करने की अनुमति होगी। इस
Bihar: बिहार सरकार ने सरकारी खजाने के इस्तेमाल में अनुशासन लाने के लिए एक नया सिस्टम लागू किया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अब सभी सरकारी विभागों को एक तय लिमिट के अंदर ही योजना मद की राशि खर्च करने की अनुमति होगी। इस कदम का मकसद फिजूलखर्ची को रोकना और बजट के इस्तेमाल में पारदर्शिता लाना है।
बजट खर्च करने की नई समय सीमा क्या है?
वित्त विभाग ने खर्च को तीन अलग-अलग चरणों में बांटा है ताकि साल के अंत में अचानक होने वाली भारी निकासी को रोका जा सके। इसके नियम इस प्रकार हैं:
- अप्रैल से जुलाई: कुल आवंटित राशि का अधिकतम 33 प्रतिशत खर्च होगा।
- अगस्त से नवंबर: 32 प्रतिशत अतिरिक्त राशि खर्च की जा सकेगी (नवंबर तक कुल 65 प्रतिशत)।
- दिसंबर से मार्च: बचा हुआ 35 प्रतिशत बजट खर्च करने की अनुमति होगी।
किन खर्चों पर कोई पाबंदी नहीं लगाई गई है?
सरकार ने यह साफ किया है कि जरूरी कामकाज न रुके, इसलिए कुछ मदों को इस सीमा से बाहर रखा गया है। वेतन, पेंशन, भत्ते और अन्य जरूरी स्थापना व्यय (Establishment Expenditure) पर कोई कठोर प्रतिबंध नहीं है। इन कामों के लिए पैसा पहले की तरह ही उपलब्ध रहेगा ताकि सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को कोई दिक्कत न हो।
अधिकारियों को क्या निर्देश दिए गए हैं?
वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर ने इस संबंध में सभी विभागों, जिलाधिकारियों और कोषागार अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। 15 अप्रैल 2026 को जारी अधिसूचना के अनुसार, तय सीमा से ज्यादा राशि की निकासी पर सख्ती से रोक लगाई जाएगी। बता दें कि वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव द्वारा पेश किए गए इस वित्तीय वर्ष के बजट का कुल आकार 3,47,589.76 करोड़ रुपये है।