Bihar: बिहार सरकार ने राज्य की पुलिस व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने निगरानी अन्वेषण संवर्ग (Vigilance Investigation Cadre) को पूरी तरह खत्म कर दिया है। इस बदलाव के बाद अब निगरानी विभाग
Bihar: बिहार सरकार ने राज्य की पुलिस व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने निगरानी अन्वेषण संवर्ग (Vigilance Investigation Cadre) को पूरी तरह खत्म कर दिया है। इस बदलाव के बाद अब निगरानी विभाग के अधिकारी सीधे बिहार पुलिस का हिस्सा बन जाएंगे, जिससे प्रशासनिक कामकाज में तेजी आएगी।
निगरानी संवर्ग खत्म होने से अधिकारियों पर क्या असर होगा?
इस फैसले के बाद निगरानी विभाग में तैनात पुलिस उपाधीक्षक (DSP), पुलिस निरीक्षक (Inspector) और पुलिस अवर निरीक्षक (Sub-Inspector) अब सीधे बिहार पुलिस में शामिल होंगे। गृह विभाग ने साफ किया है कि इन अधिकारियों की सेवा निरंतर मानी जाएगी। उनकी नियुक्ति, अनुभव और सेवा अवधि पर इस फैसले का कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा।
वरीयता और समायोजन के नियम क्या हैं?
अधिकारियों की seniority तय करने के लिए कुछ नियम बनाए गए हैं। बिहार पुलिस के संबंधित बैच के अधिकारियों की अंतिम रैंक के बाद इन अधिकारियों को स्थान दिया जाएगा। DSP रैंक के अफसरों को उनके पहले योगदान की तारीख से बिहार पुलिस सेवा में समायोजित किया जाएगा। वहीं 2014 और 2023 बैच के इंस्पेक्टर और सब-इंस्पेक्टर को भी समकक्ष पदों पर शामिल किया जाएगा।
सरकार ने यह बदलाव क्यों किया?
बिहार कैबिनेट ने 5 मई 2026 को इस प्रस्ताव को मंजूरी दी थी, जिसके बाद गृह विभाग ने 10 या 11 मई 2026 को आदेश जारी किया। यह कदम बिहार पुलिस अधिनियम, 2007 के तहत उठाया गया है। सरकार का मानना है कि इससे पुलिस और निगरानी तंत्र के बीच तालमेल बेहतर होगा और विभागीय ढांचा पहले से ज्यादा मजबूत और प्रभावी बनेगा।
Frequently Asked Questions (FAQs)
निगरानी अन्वेषण संवर्ग खत्म होने से अधिकारियों की नौकरी पर क्या असर पड़ेगा?
अधिकारियों की नौकरी पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। उनकी सेवा निरंतर मानी जाएगी और उन्हें सीधे बिहार पुलिस के समकक्ष पदों पर शामिल कर लिया जाएगा।
इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य पुलिस प्रशासन में एकरूपता लाना, बेहतर समन्वय स्थापित करना और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल और प्रभावी बनाना है।