Bihar: बिहार सरकार ने सरकारी अस्पतालों में काम करने वाले डॉक्टरों के लिए प्राइवेट प्रैक्टिस पर पूरी तरह रोक लगा दी है। स्वास्थ्य विभाग ने शनिवार, 11 अप्रैल 2026 को इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी किया। सरकार का कहना है क
Bihar: बिहार सरकार ने सरकारी अस्पतालों में काम करने वाले डॉक्टरों के लिए प्राइवेट प्रैक्टिस पर पूरी तरह रोक लगा दी है। स्वास्थ्य विभाग ने शनिवार, 11 अप्रैल 2026 को इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी किया। सरकार का कहना है कि इस कदम से सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की मौजूदगी बढ़ेगी और मरीजों को बेहतर इलाज मिल सकेगा। हालांकि, इस फैसले के बाद राज्य के डॉक्टर अब सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं।
प्राइवेट प्रैक्टिस पर रोक के मुख्य नियम क्या हैं?
सरकार ने यह आदेश ‘सात निश्चय-3’ (2025-30) कार्यक्रम के तहत लिया है, जिसका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाना है। इसके तहत अब निम्नलिखित नियमों का पालन करना होगा:
- Bihar Health Services Cadre, Bihar Medical Education Service और सरकारी मेडिकल कॉलेजों के डॉक्टर अब प्राइवेट क्लिनिक नहीं चला पाएंगे।
- Indira Gandhi Institute of Cardiology Medical Service के डॉक्टर भी इस दायरे में आएंगे।
- नियमों का उल्लंघन करने वाले डॉक्टरों पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
- मुआवजे के तौर पर सरकार Non-Practicing Allowance (NPA) और अन्य प्रोत्साहन राशि देने की योजना बना रही है।
डॉक्टर इस फैसले का विरोध क्यों कर रहे हैं?
Indian Medical Association (IMA), बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ (BHSA) और विश्व आयुर्वेद परिषद ने इस फैसले को एकतरफा बताया है। डॉक्टरों का कहना है कि बिना किसी चर्चा के लिया गया यह निर्णय गलत है। BHSA ने अपनी मांगों में कहा है कि जब तक अस्पतालों में बुनियादी ढांचा, मशीनें और स्टाफ नहीं बढ़ाया जाता, तब तक ऐसा प्रतिबंध लगाना व्यावहारिक नहीं है। डॉक्टरों की मांग है कि प्राइवेट प्रैक्टिस को अनिवार्य रूप से बंद करने के बजाय वैकल्पिक (Optional) रखा जाए।
आम जनता और स्वास्थ्य व्यवस्था पर क्या होगा असर?
बिहार स्वास्थ्य सचिव Lokesh Kumar Singh के अनुसार, इस फैसले से सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी और अनुपस्थिति कम होगी। इससे खासकर ग्रामीण इलाकों के मरीजों को फायदा होगा क्योंकि डॉक्टर अब अपना पूरा समय सरकारी ड्यूटी को देंगे। दूसरी तरफ, IMA और BHSA का मानना है कि इससे डॉक्टरों की आजीविका पर असर पड़ेगा, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। हाल ही में पटना में हुई एक संयुक्त बैठक में डॉक्टरों ने सरकार से इस नीति की समीक्षा करने की मांग की है।