Bihar को फाइलेरिया उन्मूलन के लिए UN और WHO से मिली वैश्विक सराहना, कई जिलों में दवा वितरण बंद होगा

Bihar: बिहार के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी आई है. संयुक्त राष्ट्र (UN) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने राज्य को लिम्फेटिक फाइलेरिया यानी हाथीपांव बीमारी को खत्म करने की दिशा में किए गए कामों के लिए दुनिया भर में सराहना द

Bihar: बिहार के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी आई है. संयुक्त राष्ट्र (UN) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने राज्य को लिम्फेटिक फाइलेरिया यानी हाथीपांव बीमारी को खत्म करने की दिशा में किए गए कामों के लिए दुनिया भर में सराहना दी है. यह उपलब्धि जुलाई 2026 की शुरुआत में मिली है, जिससे राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक बड़ी जीत दर्ज हुई है.

जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने मंगलवार, 7 जुलाई 2026 को बताया कि यह पूरे बिहार के लिए गर्व की बात है. उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए सरकार ने पिछले दो दशकों में स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत किया और स्वास्थ्य कर्मियों को सशक्त बनाया, जिसका नतीजा आज सामने है. वर्तमान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार इस विकास यात्रा को आगे बढ़ा रहे हैं.

बिहार ने पहली बार अपना पहला ट्रांसमिशन असेसमेंट सर्वे (TAS-1) सफलतापूर्वक पूरा किया है. इस सर्वे के आधार पर अररिया, मधेपुरा, सुपौल और किशनगंज जिलों की जांच की गई. कुल 57 इकाइयों में से 55 ने सफलता हासिल की, जिसके बाद अररिया, मधेपुरा और सुपौल जिलों में अब सामूहिक दवा प्रशासन (MDA) को रोकने और निगरानी मोड में जाने की अनुमति मिल गई है. किशनगंज की दो इकाइयों में मामूली अंतर देखा गया है.

राज्य सरकार ने इस सफलता के लिए ‘डायरेक्टली ऑब्जर्व्ड ट्रीटमेंट’ (DOT) पर खास जोर दिया. इसमें प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों की मौजूदगी में ही दवा खिलाई गई, जिससे यह पक्का हो सके कि दवा सिर्फ बांटी नहीं गई बल्कि लोगों ने उसे खाया भी है. भारत सरकार ने लक्ष्य रखा है कि 2027 तक फाइलेरिया को एक जन स्वास्थ्य समस्या के रूप में खत्म कर दिया जाए, जो डब्ल्यूएचओ के 2030 के वैश्विक लक्ष्य से तीन साल पहले है.

इस पूरे अभियान में आशा कार्यकर्ता, एएनएम, जीविका दीदियों और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHO) ने जमीनी स्तर पर कड़ी मेहनत की है. राज्य अब ट्रिपल-ड्रग रेजिमेन और वेक्टर नियंत्रण जैसी आधुनिक रणनीतियों का पालन कर रहा है ताकि इस बीमारी को जड़ से मिटाया जा सके.