Bihar के रंगकर्मी शंभू प्रसाद ने सिनेमा की चकाचौंध को छोड़ा, रंगमंच में जीते 94 मेडल

Bihar/Gaya: बिहार के गया जिले के शंभू प्रसाद, जिन्हें लोग शंभू सुमन के नाम से भी जानते हैं, ने अपनी कला के दम पर दुनिया भर में पहचान बनाई है। उन्होंने फिल्म जगत की चमक-धमक को छोड़कर रंगमंच यानी थिएटर को अपना रास्ता चुना।

Bihar/Gaya: बिहार के गया जिले के शंभू प्रसाद, जिन्हें लोग शंभू सुमन के नाम से भी जानते हैं, ने अपनी कला के दम पर दुनिया भर में पहचान बनाई है। उन्होंने फिल्म जगत की चमक-धमक को छोड़कर रंगमंच यानी थिएटर को अपना रास्ता चुना। शंभू प्रसाद ने अपने करियर में अब तक कुल 94 मेडल जीते हैं, जिनमें 50 राष्ट्रीय और एक अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार शामिल है।

शंभू प्रसाद की रंगमंच यात्रा बचपन से ही शुरू हो गई थी। उन्होंने आनंद मार्ग अकादमी में नर्सरी में पढ़ते समय ‘चाचा-भतीजा’ नाटक से शुरुआत की थी। इसके बाद रेडियो पर ‘बाल मंडली’ और ‘लोहा सिंह’ जैसे नाटकों ने उन्हें काफी प्रभावित किया, जिसके बाद उन्होंने साहित्य और देश के लिए रंगमंच को अपना कार्यक्षेत्र बनाया। साल 1989 में उन्होंने ‘कला ज्योति’ नाम के संगठन की स्थापना की। उनकी इसी मेहनत और लगन की वजह से साल 2009 में उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘नाटक श्री’ सम्मान से नवाजा गया था।

वर्तमान में शंभू प्रसाद केवल पुरस्कारों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे समाज के लिए भी काम कर रहे हैं। वे उन इलाकों में नाटकों का आयोजन कर रहे हैं जो कभी नक्सल प्रभावित रहे थे। इन नाटकों के जरिए वे वहां के युवाओं को जागरूक कर रहे हैं और उन्हें सही दिशा दिखाने का प्रयास कर रहे हैं। यह पूरी रिपोर्ट रत्नेश कुमार द्वारा तैयार की गई है।