Bihar के ये 6 फूड्स को मिला GI टैग, अब दुनिया भर में होगी पहचान, देखें पूरी लिस्ट

Bihar: बिहार के स्थानीय खान-पान और खेती की अब दुनिया भर में चर्चा हो रही है। राज्य के छह प्रमुख खाद्य उत्पादों को GI टैग मिला है, जिससे इनकी एक खास पहचान बनी है। इस टैग की वजह से अब बिहार के ये उत्पाद सिर्फ स्थानीय बाजार

Bihar: बिहार के स्थानीय खान-पान और खेती की अब दुनिया भर में चर्चा हो रही है। राज्य के छह प्रमुख खाद्य उत्पादों को GI टैग मिला है, जिससे इनकी एक खास पहचान बनी है। इस टैग की वजह से अब बिहार के ये उत्पाद सिर्फ स्थानीय बाजारों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी जगह बना रहे हैं।

GI टैग का मतलब होता है कि वह उत्पाद किसी खास भौगोलिक क्षेत्र का है और उसकी गुणवत्ता उसी जगह की वजह से है। यह सर्टिफिकेट केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय की भौगोलिक संकेत रजिस्ट्री (GIR) देती है, जो 10 साल तक मान्य रहता है। इससे किसानों और स्थानीय कारीगरों को उनके माल का सही दाम मिलता है और ब्रांडिंग में मदद मिलती है।

उत्पाद का नाम विशेषता और क्षेत्र GI टैग वर्ष
मगही पान गया, नवादा, औरंगाबाद और नालंदा; पत्तियां मुलायम और चमकदार होती हैं। 2018
जर्दालू आम भागलपुर; अपनी मिठास और खुशबू के लिए मशहूर, ब्रिटेन तक निर्यात हुआ। 2018
कतरनी चावल भागलपुर, बांका और मुंगेर; प्राकृतिक खुशबू और बेहतरीन स्वाद। 2018
शाही लीची मुजफ्फरपुर; रसदार गूदा और मनमोहक खुशबू। 2018
मर्चा चावल पश्चिम चंपारण; काली मिर्च जैसा आकार और खास खुशबू। 2023
मिथिला मखाना मिथिला क्षेत्र; पौष्टिक उत्पाद, हाल ही में दुबई निर्यात किया गया। 2021

इन उत्पादों में कतरनी चावल ने किसानों की किस्मत बदल दी है। जीआई टैग के बाद इसकी खेती 500 एकड़ से बढ़कर 3,000 एकड़ से ज्यादा हो गई है और कीमत 60 रुपये से बढ़कर 150 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। वहीं, भागलपुर के जर्दालू आम की पहली व्यावसायिक खेप ब्रिटेन भेजी गई थी।

बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU), सबौर और नाबार्ड मिलकर किसानों को इन उत्पादों की ब्रांडिंग और क्यूआर कोड बनाने में मदद कर रहे हैं। खाद्य उत्पादों के अलावा, हाल ही में नालंदा की बावन बूटी साड़ी, गया की पथरकट्टी पत्थर शिल्पकला और भोजपुर की पिड़िया चित्रकला को भी जीआई प्रमाणन मिला है।