Bihar में बाढ़ को लेकर सरकार अलर्ट, सचिव ने सारण, वैशाली और भागलपुर में जांची तैयारी

Bihar: राज्य में 2026 की बाढ़ से निपटने के लिए जल संसाधन विभाग ने पूरी तैयारी शुरू कर दी है। विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह खुद जमीन पर उतरकर तटबंधों और कटाव रोकने वाले कामों का जायजा ले रहे हैं। सरकार का मुख्य फोकस उन

Bihar: राज्य में 2026 की बाढ़ से निपटने के लिए जल संसाधन विभाग ने पूरी तैयारी शुरू कर दी है। विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह खुद जमीन पर उतरकर तटबंधों और कटाव रोकने वाले कामों का जायजा ले रहे हैं। सरकार का मुख्य फोकस उन संवेदनशील इलाकों पर है जहां हर साल बाढ़ का खतरा बना रहता है।

हाल ही में सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने सारण और वैशाली जिलों का दौरा किया। उन्होंने सोनपुर ब्लॉक के सबलपुर पचियारी टोला में गंगा नदी के किनारे हो रहे बोल्डर एप्रन के काम को अगले 10 दिनों के भीतर पूरा करने का आदेश दिया है। साथ ही उन्होंने निर्देश दिया कि स्लोप पिचिंग और बाकी बचे सभी काम इसी जुलाई महीने में खत्म कर लिए जाएं।

इससे पहले 4 जुलाई को सचिव ने भागलपुर जिले के इस्मापुर-बिंदटोली तटबंध का निरीक्षण किया था। वहां उन्होंने काम में तेजी लाने के लिए मजदूरों और मशीनों की संख्या बढ़ाने को कहा है ताकि काम 24 घंटे चल सके। उन्होंने अधिकारियों को सख्त चेतावनी दी है कि बाढ़ सुरक्षा के काम में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और समय पर काम पूरा न होने पर जवाबदेही तय होगी।

बिहार के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 73.06 प्रतिशत हिस्सा बाढ़ प्रभावित है, जिसमें 38 में से 29 जिले आते हैं। राज्य के 381 चिन्हित स्थलों पर 1115 करोड़ रुपये की लागत से सुरक्षा कार्य चल रहे हैं। उपमुख्यमंत्री और जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने बताया कि सरकार बाढ़ और कम बारिश दोनों स्थितियों के लिए तैयार है। सरकार की योजना है कि बाढ़ के अतिरिक्त पानी को नहरों और जलाशयों में मोड़ा जाए ताकि सूखे के समय इसका इस्तेमाल सिंचाई के लिए हो सके।

प्रशासन ने जिलाधिकारियों को भी कड़े निर्देश दिए हैं। 29 बाढ़ प्रभावित जिलों में से 15 को ‘अत्यधिक बाढ़ प्रवण’ श्रेणी में रखा गया है। राहत सामग्री जैसे चावल, दाल और पॉलीथीन शीट के लिए टेंडर की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इसके अलावा, स्कूलों और पंचायत भवनों को शेल्टर होम के रूप में चिन्हित किया गया है, जहां पीने का पानी, बिजली और मेडिकल कैंप की व्यवस्था होगी। नावों की मरम्मत और उनके मालिकों के साथ समझौते का काम भी पूरा किया जा रहा है।