Bihar में बनेगा फ्लोटिंग विलेज, बाढ़ के समय पानी पर तैरेंगे घर; NDRF की रेस्क्यू टीम भी कर सकेगी इस्तेमाल

Bihar: बिहार में बाढ़ की समस्या से निपटने के लिए एक अनोखा तरीका अपनाया जा रहा है। इंजीनियर Prashant Kumar ने एक ऐसा घर बनाया है जो बाढ़ आने पर डूबता नहीं है, बल्कि पानी के ऊपर तैरने लगता है। अब इस मॉडल को बड़े स्तर पर ले

Bihar: बिहार में बाढ़ की समस्या से निपटने के लिए एक अनोखा तरीका अपनाया जा रहा है। इंजीनियर Prashant Kumar ने एक ऐसा घर बनाया है जो बाढ़ आने पर डूबता नहीं है, बल्कि पानी के ऊपर तैरने लगता है। अब इस मॉडल को बड़े स्तर पर ले जाते हुए बिहार में एक ‘फ्लोटिंग विलेज’ यानी तैरते हुए गांव बनाने की योजना है, जिसका इस्तेमाल मुख्य रूप से रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए किया जाएगा।

Prashant Kumar ने 2020 में Centre of Resilience की शुरुआत की थी। उन्होंने स्थानीय और रिसाइकिल सामान का इस्तेमाल करके तीन कमरों वाला एक प्रोटोटाइप घर तैयार किया है। इस घर को बनाने में करीब 6 लाख रुपये का खर्च आया था, लेकिन अब कोशिश यह है कि इसकी लागत घटाकर 1.5 लाख रुपये प्रति यूनिट तक लाई जाए ताकि गरीब और जरूरतमंद लोग भी इसका फायदा उठा सकें।

इस प्रोजेक्ट को लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी चर्चा हुई है। दिसंबर 2025 में बिहार के मुख्य सचिव Pratyay Amrit ने इस प्रोजेक्ट का दौरा किया था और इसे बाढ़ प्रभावित जिलों के लिए एक बेहतर मॉडल बताया था। हालांकि, उन्होंने इसकी मजबूती और क्वालिटी की और जांच करने की बात कही थी। प्रशांत कुमार ने जनवरी 2026 में मुख्यमंत्री Nitish Kumar के सामने 20-25 घरों वाले एक ‘मिनी फ्लोटिंग विलेज’ का प्लान पेश करने की तैयारी की थी।

इस तैरते हुए गांव का इस्तेमाल NDRF जैसी आपदा प्रबंधन एजेंसियों द्वारा रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान किया जा सकेगा। इससे पहले सितंबर 2024 में बक्सर के गंगा नदी तट पर एक पायलट प्रोजेक्ट पूरा किया गया था, जिसे पर्यावरण के अनुकूल बनाया गया है। यह घर मानसून के दौरान पानी के साथ ऊपर उठता है और बाकी समय जमीन पर रहता है। फिलहाल यह पूरा प्रोजेक्ट प्लानिंग स्टेज में है और किसी बाहरी इंजीनियरिंग बॉडी से इसका सर्टिफिकेशन होना बाकी है।