Bihar: राज्य सरकार ने खेती-किसानी को डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब तक 50 लाख से ज्यादा किसानों की फार्मर रजिस्ट्री का काम पूरा हो चुका है। इस डिजिटल पहचान यानी फार्मर आईडी के जरिए किसानों को सरकारी योजना
Bihar: राज्य सरकार ने खेती-किसानी को डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब तक 50 लाख से ज्यादा किसानों की फार्मर रजिस्ट्री का काम पूरा हो चुका है। इस डिजिटल पहचान यानी फार्मर आईडी के जरिए किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी परेशानी के सीधे और पारदर्शी तरीके से मिल सकेगा।
पंजीकरण की प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेज क्या हैं?
फार्मर रजिस्ट्रेशन अभियान का दूसरा चरण 12 मई 2026 से शुरू हुआ है जो 30 जून 2026 तक चलेगा। पंजीकरण के लिए किसानों को अपना आधार कार्ड, मोबाइल नंबर और जमाबंदी की जानकारी देनी होगी। किसान इसके लिए बिहार फार्मर रजिस्ट्री पोर्टल पर ऑनलाइन जा सकते हैं, क्यूआर कोड स्कैन कर सकते हैं या नजदीकी सीएससी केंद्र, कृषि समन्वयक और किसान सलाहकार की मदद ले सकते हैं।
किसानों को मिलने वाले फायदे और सरकारी नियम क्या हैं?
मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने इस व्यवस्था की तुलना UPI से की है। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में खाद लेने के लिए भी इसी फार्मर आईडी कार्ड का इस्तेमाल हो सकेगा। पीएम-किसान सम्मान निधि, फसल बीमा और कृषि अनुदान जैसी योजनाओं के लिए यह आईडी अनिवार्य होगी। सबसे बड़ी राहत यह है कि पंजीकरण के लिए किसानों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। पहले सीएससी केंद्रों द्वारा लिया जाने वाला 15 रुपये का शुल्क अब संबंधित विभाग देगा।
मदद के लिए हेल्पलाइन और लक्ष्य की जानकारी
सरकार ने किसानों की सहायता के लिए दो हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। कृषि विभाग के लिए 18001801551 और राजस्व विभाग के लिए 18003456215 पर संपर्क किया जा सकता है। बिहार कृषि ऐप अब हिंदी, अंग्रेजी, मगही, भोजपुरी, अंगिका और बज्जिका भाषाओं में उपलब्ध है। सरकार का लक्ष्य इस वर्ष के अंत तक लगभग 80 लाख किसानों को पंजीकृत करना है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
फार्मर आईडी बनवाने के लिए कितना शुल्क देना होगा?
किसान पंजीकरण के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) या वसुधा केंद्रों द्वारा पहले ली जाने वाली 15 रुपये की सेवा शुल्क अब संबंधित सरकारी विभाग वहन करेगा।
फार्मर रजिस्ट्री के लिए कौन से दस्तावेज जरूरी हैं?
पंजीकरण के लिए किसानों को अपना आधार कार्ड, सक्रिय मोबाइल नंबर और जमीन की जमाबंदी की जानकारी देनी होगी।