Bihar : पटना जिले के मसौढ़ी अनुमंडल स्थित कोरियांवा गांव के किसान ललित कुमार ने खेती का एक नया तरीका अपनाकर सबको हैरान कर दिया है. उन्होंने पारंपरिक धान और गेहूं की जगह नागपुर से चीकू के पौधे मंगवाए और अपनी 12 बीघा जमीन
Bihar : पटना जिले के मसौढ़ी अनुमंडल स्थित कोरियांवा गांव के किसान ललित कुमार ने खेती का एक नया तरीका अपनाकर सबको हैरान कर दिया है. उन्होंने पारंपरिक धान और गेहूं की जगह नागपुर से चीकू के पौधे मंगवाए और अपनी 12 बीघा जमीन पर बागवानी शुरू की. अब इस प्रयोग से उन्हें जबरदस्त मुनाफा मिल रहा है और वह इलाके के अन्य किसानों के लिए मिसाल बन गए हैं.
ललित कुमार ने कैसे शुरू की चीकू की खेती
बिहार में आमतौर पर किसान धान, गेहूं और मक्का जैसी फसलें उगाते हैं, लेकिन इनमें उतनी कमाई नहीं होती थी. इसी समस्या को देखते हुए ललित कुमार ने आधुनिक खेती की ओर रुख किया. उन्होंने महाराष्ट्र के नागपुर से चीकू के पौधे लाकर अपने खेत में लगाए. अब उनकी यह मेहनत रंग ला रही है और उन्हें पारंपरिक फसलों के मुकाबले काफी ज्यादा मुनाफा मिल रहा है.
चीकू की खेती में कितना है फायदा और क्या है तरीका
कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक चीकू की खेती उन इलाकों के लिए बहुत अच्छी है जहां पानी की कमी रहती है. इसकी देखरेख के लिए कुछ मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:
- गर्मियों में हफ्ते में एक बार और सर्दियों में 10-15 दिन में एक बार सिंचाई काफी होती है.
- एक परिपक्व पेड़ से साल भर में करीब 120-130 किलोग्राम फल मिल सकते हैं.
- बाजार में चीकू की कीमत 40 से 50 रुपये प्रति किलोग्राम तक रहती है.
- जैविक खाद और समय पर निराई-गुड़ाई करने से उत्पादन और बढ़ जाता है.
बिहार सरकार और आधुनिक खेती के नए प्रयास
बिहार सरकार भी किसानों की आय बढ़ाने के लिए कई कदम उठा रही है. सरकार रियायती दरों पर आम और नारियल के पौधों का वितरण कर रही है. इसके अलावा, किसानों को मिट्टी की जांच के लिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड दिए जा रहे हैं. सरकार ने किसानों को हाई-टेक खेती सिखाने के लिए उन्हें इजराइल भेजने की योजना भी बनाई है ताकि राज्य में खेती के आधुनिक तरीकों को बढ़ावा मिले.