Bihar की चांदी जैसी ‘चेपुआ’ मछली का दुनिया में बढ़ा क्रेज, स्वाद और सेहत में हिलसा से भी आगे
Bihar: बिहार की गंडक नदी में पाई जाने वाली चेपुआ मछली अब अपनी खास पहचान बना चुकी है. चांदी की तरह चमकने वाली यह छोटी मछली अपने लाजवाब स्वाद और पोषक तत्वों की वजह से काफी महंगी बिकती है. रोहू और कतला जैसी बड़ी मछलियों के
Bihar: बिहार की गंडक नदी में पाई जाने वाली चेपुआ मछली अब अपनी खास पहचान बना चुकी है. चांदी की तरह चमकने वाली यह छोटी मछली अपने लाजवाब स्वाद और पोषक तत्वों की वजह से काफी महंगी बिकती है. रोहू और कतला जैसी बड़ी मछलियों के मुकाबले लोग इसे ज्यादा पसंद कर रहे हैं क्योंकि यह सेहत के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती है.
इस मछली की खासियत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है. साल 2015 में अमेरिकन फूड सोसाइटी और भारत-नेपाल के वैज्ञानिकों ने एक रिसर्च की थी. इस अध्ययन में पाया गया कि चेपुआ मछली ओमेगा-3, ओमेगा-6, प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन और मैग्नीशियम जैसे तत्वों से भरपूर है. शोध के मुताबिक यह पोषक तत्वों के मामले में मशहूर हिलसा मछली से भी बेहतर पाई गई. गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर विनय कुमार सिंह ने बताया कि गंडक नदी का ऑक्सीजन लेवल और पीएच मान इस मछली के प्रजनन के लिए एकदम सही है और पहाड़ों से आने वाले खनिज इसे और भी पौष्टिक बनाते हैं.
आर्थिक नजरिए से देखें तो यह मछली बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के धनहा, बगहा, पिपरासी और ठकराहा समेत यूपी के कई गांवों के लोगों की कमाई का जरिया बनी है. बाजार में इसकी मांग बहुत ज्यादा है, जिसकी वजह से कीमतें भी काफी ऊंची रहती हैं.
| प्रोडक्ट | अनुमानित कीमत (प्रति किलो) |
|---|---|
| ताजी मछली | ₹250 – ₹350 |
| ढाबों पर तली हुई मछली | ₹600 – ₹700 |
| चेपुआ का अचार | ₹1,000 – ₹1,200 |
मछली की बढ़ती डिमांड को देखते हुए सरकार और वैज्ञानिक इसके कृत्रिम प्रजनन यानी ब्रीडिंग पर काम कर रहे हैं. वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया के शोधकर्ता आशीष पांडा ने इसे वैज्ञानिक रूप से एस्पिडोपारिया मोरार के रूप में पहचाना है. NBFGR लखनऊ की टीम ने कुशीनगर का दौरा कर इसके सैंपल लिए ताकि इसे व्यावसायिक स्तर पर पालने का तरीका खोजा जा सके. दिसंबर 2025 में मत्स्य विभाग ने ब्रीडिंग की दिशा में ठोस कदम उठाए और वर्ल्ड फिश सीरीज के एक्सपर्ट्स ने गंडक नदी क्षेत्र का निरीक्षण किया.
मछुआरों की मदद के लिए बिहार सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए ‘मुख्यमंत्री मछुआ कल्याण योजना’ को मंजूरी दी है. इस योजना के तहत जाल, बाल्टी और डिजिटल तराजू जैसे उपकरणों पर 100% अनुदान दिया जाएगा. वहीं, आइस बॉक्स वाले थ्री-व्हीलर वाहनों पर 50% अनुदान मिलेगा. इस योजना के लिए आवेदन की आखिरी तारीख 31 अगस्त 2025 तय की गई है. इसके अलावा पूर्णिया जिले में मछली संरक्षण के लिए जून से अगस्त तक मछली पकड़ने पर रोक लगाई गई है.