Bihar: बक्सर जिले के ब्रह्मपुर प्रखंड स्थित कांट गांव में किसानों और एक बड़ी कंपनी के बीच विवाद बढ़ गया है। यहां के ग्रामीणों ने JK Cement फैक्ट्री पर आरोप लगाया है कि कंपनी ने सफाई के बहाने कृषि विभाग के दो सिंचाई डैम त
Bihar: बक्सर जिले के ब्रह्मपुर प्रखंड स्थित कांट गांव में किसानों और एक बड़ी कंपनी के बीच विवाद बढ़ गया है। यहां के ग्रामीणों ने JK Cement फैक्ट्री पर आरोप लगाया है कि कंपनी ने सफाई के बहाने कृषि विभाग के दो सिंचाई डैम तोड़ दिए। इस वजह से इलाके के किसानों को भारी नुकसान हुआ है और अब यह मामला लोक शिकायत निवारण तक पहुंच गया है।
क्या है पूरा मामला और कैसे हुआ नुकसान
ग्रामीणों का कहना है कि छेरा नदी पर ब्रिटिश काल में बनाए गए चेक डैम सिंचाई के लिए बहुत जरूरी थे। ये डैम न सिर्फ खेतों की सिंचाई करते थे, बल्कि जंगली जानवरों के लिए भी पानी का मुख्य जरिया थे। आरोप है कि JK Cement ने अपने कचरे को नदी से आसानी से निकालने के लिए सफाई के नाम पर इन डैमों को तोड़ दिया। इससे अब इलाके में पानी की किल्लत हो गई है और किसानों को डर है कि नदी का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।
जांच में क्या सामने आया और अब तक क्या हुई कार्रवाई
इस मामले की शिकायत पहले भोजपुर जिलाधिकारी से की गई थी, लेकिन वहां से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद 30 मार्च 2026 को लघु सिंचाई विभाग के कनीय अभियंता ज्ञान रंजन ने मौके पर जाकर जांच की। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में इसे एक सोची-समझी साजिश और कुकृत्य बताया। इंजीनियर ने पाया कि डैम को बिना किसी सरकारी अनुमति के तोड़ा गया था। हालांकि, शिकायत के एक महीने बाद भी कोई एक्शन न होने पर ग्रामीणों ने अब लोक शिकायत निवारण का दरवाजा खटखटाया है।
कौन-कौन लोग और विभाग इस मामले से जुड़े हैं
इस विवाद में मुख्य रूप से JK Cement फैक्ट्री, कांट गांव के किसान और लघु सिंचाई विभाग शामिल हैं। जांच के दौरान पर्यावरण संरक्षक शैलेश कुमार ओझा और शंभू चंद्रवंशी जैसे ग्रामीण भी मौजूद थे। किसानों की मांग है कि उनके नुकसान की भरपाई हो और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में सरकारी संपत्ति को नुकसान न पहुंचे।
Frequently Asked Questions (FAQs)
JK Cement फैक्ट्री पर क्या आरोप लगे हैं?
फैक्ट्री पर आरोप है कि उसने सफाई के नाम पर कृषि विभाग के दो सिंचाई डैम तोड़ दिए, ताकि नदी से अपना कचरा आसानी से निकाल सके।
सरकारी जांच में क्या पता चला?
लघु सिंचाई विभाग के जूनियर इंजीनियर ज्ञान रंजन ने जांच में पाया कि डैम को बिना किसी आधिकारिक अनुमति के साजिश के तहत तोड़ा गया था।