Bihar: भोजपुर जिले के शाहपुर ब्लॉक स्थित दिलमनपुर गांव में एक अनोखी शवयात्रा निकाली गई। यहां 95 साल की कौशल्या देवी के निधन के बाद उनके पोतों ने उनकी विदाई को यादगार बनाने के लिए एक भव्य आयोजन किया। परिवार ने इसे शोक मना
Bihar: भोजपुर जिले के शाहपुर ब्लॉक स्थित दिलमनपुर गांव में एक अनोखी शवयात्रा निकाली गई। यहां 95 साल की कौशल्या देवी के निधन के बाद उनके पोतों ने उनकी विदाई को यादगार बनाने के लिए एक भव्य आयोजन किया। परिवार ने इसे शोक मनाने के बजाय उनके लंबे जीवन का जश्न मनाने वाली ‘विजय यात्रा’ का नाम दिया।
शवयात्रा में क्या-क्या खास रहा
इस शवयात्रा में करीब 3,500 लोग शामिल हुए। आयोजन में 700 गाड़ियों का लंबा काफिला निकला और 15 से ज्यादा बैंड पार्टियां बजीं। माहौल को यादगार बनाने के लिए डीजे पर निर्गुण भजन बजाए गए और पारंपरिक लौंडा नाच का आयोजन भी हुआ। पूरी यात्रा की रिकॉर्डिंग के लिए 100 से ज्यादा ड्रोन कैमरों का इस्तेमाल किया गया।
क्यों किया गया ऐसा भव्य आयोजन
कौशल्या देवी पिछले तीन साल से कैंसर से जूझ रही थीं और वह स्वर्गीय डॉ. जनार्दन पांडेय की पत्नी थीं। उनके छह पोतों, जिनमें रमेश पांडेय, अजय, अमर, गणेश और मंटू पांडेय शामिल हैं, ने यह आयोजन किया। परिवार का कहना है कि यह उनकी दादी की इच्छा थी कि उनकी विदाई वैसी ही शानदार हो, जैसे 80 साल पहले उनके दुल्हन बनकर आने पर हुई थी।
कौन लोग थे इस आयोजन में शामिल
इस आयोजन को कौशल्या देवी के बेटों, वृंदा बन पांडेय और नारद पांडेय के साथ उनके पोतों ने मिलकर संभाला। परिवार के सदस्य कोयला व्यापार, ट्रांसपोर्ट, सॉफ्ट ड्रिंक इंडस्ट्री और मीडिया जैसे व्यवसायों से जुड़े हैं। परिवार ने समाज को यह संदेश देने की कोशिश की कि बुजुर्गों के योगदान का सम्मान करना चाहिए और उनके जीवन को खुशी के साथ याद करना चाहिए।
Frequently Asked Questions (FAQs)
बिहार के भोजपुर में यह अनोखी शवयात्रा किसकी थी?
यह शवयात्रा 95 वर्षीय कौशल्या देवी की थी, जो दिलमनपुर गांव की रहने वाली थीं और पिछले तीन साल से कैंसर से पीड़ित थीं।
शवयात्रा को ‘विजय यात्रा’ क्यों कहा गया?
परिवार ने इसे शोक के बजाय उनके लंबे और सार्थक जीवन का जश्न मनाने के लिए ‘विजय यात्रा’ का नाम दिया, ताकि बुजुर्गों के योगदान का सम्मान किया जा सके।