Bihar के भोजपुर में भरत तिवारी केस में उबाल, मां आशा देवी आमरण अनशन पर बैठेंगी

Bihar/Bhojpur: भोजपुर के बिलौटी गांव में हुए भरत भूषण तिवारी मुठभेड़ मामले में तनाव बढ़ गया है। मृतक की मां आशा देवी ने दोषी पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठने का फैसला किया है। इस बीच पुलिस ने

Bihar/Bhojpur: भोजपुर के बिलौटी गांव में हुए भरत भूषण तिवारी मुठभेड़ मामले में तनाव बढ़ गया है। मृतक की मां आशा देवी ने दोषी पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठने का फैसला किया है। इस बीच पुलिस ने परिवार के सदस्यों के बयान दर्ज किए हैं और मानवाधिकार आयोग ने सरकार को मुआवजे के निर्देश दिए हैं।

भरत तिवारी प्रकरण में बुधवार, 8 जुलाई 2026 को पुलिस ने मृतक की मां, भाभी और भाई के बयान दर्ज किए। इसके बाद आशा देवी ने घोषणा की कि वह गुरुवार सुबह 11 बजे से आमरण अनशन शुरू करेंगी। परिवार की मुख्य मांग है कि जगदीशपुर DSP राजेश शर्मा, शाहपुर SHO राजेश कुमार मलकार, SI अंकित आर्यन, SI सचिनंद यादव और STF जवान अक्षय कुमार को तुरंत गिरफ्तार किया जाए।

इस मामले में बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग ने भी दखल दिया है। आयोग ने बिहार सरकार को आदेश दिया है कि मृतक के आश्रितों को जल्द से जल्द अनुग्रह राशि का भुगतान किया जाए। सरकार को इस पर रिपोर्ट देने के लिए दो हफ्ते का समय मिला है और अगली सुनवाई 3 अगस्त को होगी।

दूसरी तरफ, भोजपुर साइबर पुलिस ने इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर निगरानी बढ़ा दी है। पुलिस ने 30 ऐसे अकाउंट धारकों के खिलाफ FIR दर्ज की है जिन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ भड़काऊ और अभद्र पोस्ट साझा किए थे।

जांच की बात करें तो पुलिस ने मुठभेड़ में इस्तेमाल हुए तीनों हथियारों को Forensic Science Lab (FSL) भेजा है। इससे यह साफ होगा कि भरत तिवारी को किसकी गोली लगी थी। शुरुआती जांच में सामने आया था कि STF जवान अक्षय कुमार ने पहली गोली चलाई थी। बिहार सरकार ने इस पूरे मामले की न्यायिक जांच एक रिटायर्ड हाईकोर्ट जज की देखरेख में कराने का फैसला किया है।

परिवार ने सरकार के सामने कुछ और मांगें भी रखी हैं, जिनमें सदस्यों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और गांव के उन निर्दोष लड़कों पर दर्ज फर्जी मुकदमों को वापस लेना शामिल है जिन्हें पुलिस ने इस प्रकरण के बाद नामजद किया था।