Bihar: भागलपुर जिले के सुंदरवन इलाके में एशिया का इकलौता गरुड़ बचाव एवं पुनर्वास केंद्र चलाया जा रहा है. यहाँ बीमार और घायल गरुड़ों (Greater Adjutant Stork) का इलाज किया जाता है और उनके ठीक होने के बाद उन्हें वापस जंगल म
Bihar: भागलपुर जिले के सुंदरवन इलाके में एशिया का इकलौता गरुड़ बचाव एवं पुनर्वास केंद्र चलाया जा रहा है. यहाँ बीमार और घायल गरुड़ों (Greater Adjutant Stork) का इलाज किया जाता है और उनके ठीक होने के बाद उन्हें वापस जंगल में छोड़ दिया जाता है. इस केंद्र की वजह से इलाके में इन दुर्लभ पक्षियों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है.
सुंदरवन केंद्र में कैसे होता है गरुड़ों का बचाव
यह केंद्र भागलपुर वन प्रमंडल द्वारा संचालित है. यहाँ बिजली के झटकों या पंखों में चोट लगने की वजह से घायल हुए पक्षियों को लाया जाता है. 28 मई 2025 को ही यहाँ से 10 स्वस्थ गरुड़ों को उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया था. ये पक्षी बेगूसराय, खगड़िया और कदवा जैसे इलाकों से इलाज के लिए लाए गए थे.
संरक्षण में किन लोगों और संस्थाओं का है हाथ
गरुड़ों को बचाने में वन विभाग के साथ-साथ स्थानीय लोगों का बड़ा योगदान है. कदवा दियारा के ग्रामीण और ‘गरुड़ सेविका महिला संगठन’ इन पक्षियों के प्रजनन के लिए माहौल तैयार करने और पेड़ों की रक्षा करने में मदद कर रहे हैं. पर्यावरणविद् अरविंद मिश्रा 2006 से इस काम में जुटे हैं, जबकि नगीना राय पिछले 20 सालों से घायल पक्षियों का इलाज कर रहे हैं.
गरुड़ संरक्षण से जुड़ी खास बातें
| विवरण |
जानकारी |
| कुल वैश्विक आबादी |
1400-1700 के बीच |
| भागलपुर में आबादी |
600-700 पक्षी |
| प्रजनन क्षेत्र |
दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा क्षेत्र (कदवा दियारा) |
| IUCN स्टेटस |
लुप्तप्राय प्रजाति (Endangered) |
| सरकारी कदम |
हाई-टेंशन लाइन को अंडरग्राउंड कराया गया |
| फायदा |
फसल बर्बाद करने वाले चूहों और कीटों का खाकर नियंत्रण |