Bihar बंद और छात्र आंदोलन के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा, कहलगांव और पटना में पुलिस रही अलर्ट
Bihar/Bhagalpur: नीट पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे भारी विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। 25 जुलाई 2026 को छात्र संगठनों द्वारा
Bihar/Bhagalpur: नीट पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे भारी विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। 25 जुलाई 2026 को छात्र संगठनों द्वारा बुलाए गए बिहार बंद के दौरान राज्य के कई हिस्सों में तनाव देखा गया, जिसे देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा।
भागलपुर के कहलगांव में बंद के असर को देखते हुए स्थानीय पुलिस ने शहर के मुख्य बाजारों, रेलवे स्टेशन और संवेदनशील चौराहों पर फ्लैग मार्च निकाला। प्रशासन ने शांति बनाए रखने के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। वहीं पटना में स्थिति अधिक गंभीर रही, जहां संवेदनशील इलाकों में सीआईएसएफ, बीएसएफ, एसएसबी और सीआरपीएफ जैसे केंद्रीय बलों की तैनाती की गई थी। पटना एसएसपी कार्तिकेय शर्मा ने साफ चेतावनी दी थी कि कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी।
यह पूरा विवाद 20 जुलाई को बिहार विधानसभा के मानसून सत्र से शुरू हुआ था, जहां विपक्षी दलों ने पेपर लीक का मुद्दा उठाया था। इसके बाद 22 जुलाई को ‘ब्लैक डे’ मनाया गया, जिसमें पटना में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें हुईं और 170 से ज्यादा लोग घायल हुए। 23 और 24 जुलाई को पूरे राज्य में ‘प्रतिरोध दिवस’ मनाया गया, जिसके बाद 25 जुलाई को आइसा (AISA) और आरवाईए (RYA) जैसे संगठनों ने बिहार बंद का आह्वान किया।
विरोध प्रदर्शनों के दबाव के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई को इस्तीफा देते हुए कहा कि छात्रों को अपनी शिक्षा पर ध्यान देना चाहिए और इस आंदोलन को राष्ट्र-विरोधी ताकतों का हिस्सा नहीं बनना चाहिए। इस बीच, कॉकरीच जनता पार्टी (CJP) ने नीट रद्द होने के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों के लिए 1 करोड़ रुपये मुआवजे की मांग की थी, जिस पर सरकार ने सकारात्मक संकेत दिए हैं।
बंद के दौरान छपरा, पटना और सासाराम जैसे जिलों में प्रदर्शन हिंसक हो गए, जहां छात्रों ने पथराव किया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल करना पड़ा। पुलिस ने सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट डालने वालों पर नजर रखी और 117 संदिग्धों की तस्वीरें जारी कर उनकी पहचान करने की कोशिश की।