Bihar: कहलगांव के बरैनी गांव में सरकारी तालाब की खुदाई को लेकर हुआ विवाद अब बड़ा रूप ले चुका है। इस मामले में प्रशासन और ग्रामीणों के बीच टकराव के बाद अब उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी गई है। ग्रामीणों ने कहलगांव के SDO और
Bihar: कहलगांव के बरैनी गांव में सरकारी तालाब की खुदाई को लेकर हुआ विवाद अब बड़ा रूप ले चुका है। इस मामले में प्रशासन और ग्रामीणों के बीच टकराव के बाद अब उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी गई है। ग्रामीणों ने कहलगांव के SDO और SDPO पर मारपीट के गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि पुलिस का कहना है कि उन पर हमला हुआ था।
विवाद की मुख्य वजह क्या थी
यह पूरा मामला स्कूल के पीछे स्थित एक सरकारी तालाब की खुदाई से शुरू हुआ। ग्रामीणों की मांग 2013 से थी कि तालाब को भरकर वहां खेल का मैदान बनाया जाए ताकि बच्चों के डूबने का खतरा खत्म हो सके। 27 मई 2026 को जब मुखिया पति Ravi Paswan जेसीबी मशीन लेकर खुदाई करने पहुंचे, तो ग्रामीणों ने इसका विरोध किया और कथित तौर पर उनके साथ मारपीट की।
प्रशासन और पुलिस पर क्या आरोप लगे हैं
मौके पर पहुंचे SDO Krishna Chandra Gupta और SDPO ने स्थिति संभालने की कोशिश की, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारियों ने उनके साथ मारपीट की। ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि कई लोगों को उनके घरों से उठाकर पुलिस स्टेशन ले जाया गया और 24 घंटे तक बिना खाने-पीने के रखा गया। इस मामले में SDO और SDPO के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई है।
पुलिस की कार्रवाई और जनप्रतिनिधियों का दौरा
पुलिस के मुताबिक, ग्रामीणों ने उन पर पथराव किया जिससे एक सरकारी गाड़ी और जेसीबी मशीन को नुकसान पहुंचा। भीड़ को हटाने के लिए पुलिस ने हल्का लाठीचार्ज भी किया और कुछ लोगों को हिरासत में लिया। 2 जून 2026 को कहलगांव और पीरपैंती के MLAs ने गांव का दौरा किया और पीड़ितों से मुलाकात की। उन्होंने भरोसा दिया कि इस मामले की निष्पक्ष जांच होगी और दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
बरैनी गांव में विवाद क्यों शुरू हुआ?
विवाद सरकारी तालाब की खुदाई को लेकर शुरू हुआ। ग्रामीण चाहते थे कि तालाब को भरकर वहां बच्चों के लिए खेल का मैदान बनाया जाए ताकि डूबने जैसी दुर्घटनाएं न हों।
इस मामले में अब तक क्या कानूनी कार्रवाई हुई है?
मामले में दोनों तरफ से FIR दर्ज हुई है। एक तरफ ग्रामीणों ने SDO और SDPO पर मारपीट का आरोप लगाया है, वहीं दूसरी तरफ पुलिस टीम पर हमले और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के लिए ग्रामीणों पर केस दर्ज है।