Bihar: बिहार की पंचायतों में पोषण पखवाड़ा 2026 के दौरान एक अनोखी पहल देखने को मिली है। यहाँ ‘खिलौना दान अभियान’ अब एक जन-आंदोलन बन चुका है, जिससे आंगनवाड़ी केंद्रों की तस्वीर बदल रही है। इस अभियान का मकसद कें
Bihar: बिहार की पंचायतों में पोषण पखवाड़ा 2026 के दौरान एक अनोखी पहल देखने को मिली है। यहाँ ‘खिलौना दान अभियान’ अब एक जन-आंदोलन बन चुका है, जिससे आंगनवाड़ी केंद्रों की तस्वीर बदल रही है। इस अभियान का मकसद केंद्रों को बच्चों के लिए जीवंत बनाना है ताकि 3 से 6 साल के बच्चे खेल-खेल में नई चीजें सीख सकें और उनका मानसिक व सामाजिक विकास हो सके।
क्या है खिलौना दान अभियान और इसका उद्देश्य
इस अभियान के तहत लोगों से अपील की गई है कि वे अपने घर में रखे पुराने और बेकार खिलौनों को पास के आंगनवाड़ी केंद्रों में दान करें। इसका मुख्य लक्ष्य बच्चों के लिए खेल-आधारित शिक्षा को बढ़ावा देना है। इससे बच्चों को स्कूल जाने की तैयारी में मदद मिलेगी और उनका रचनात्मक विकास होगा। पंचायती राज विभाग और समाज कल्याण विभाग इस पूरी प्रक्रिया का संचालन कर रहे हैं, जबकि सेंटर फॉर कैटालाइजिंग चेंज (C-3) विभाग के साथ मिलकर काम कर रहा है।
बिहार ने देश भर में कैसे बनाया पहला स्थान
बिहार ने पोषण पखवाड़ा 2026 के दौरान शानदार प्रदर्शन किया है। राज्य में 9 अप्रैल से 23 अप्रैल 2026 तक विभिन्न गतिविधियां आयोजित की गईं। आंकड़ों के मुताबिक, बिहार ने 73 लाख से अधिक गतिविधियों का आयोजन कर पूरे देश में पहला स्थान हासिल किया है। इस काम में महिला जनप्रतिनिधियों, आंगनवाड़ी सेविकाओं और स्वास्थ्यकर्मियों ने बड़ी भूमिका निभाई है।
किन जिलों और जनप्रतिनिधियों ने दिखाई सक्रियता
इस अभियान को सफल बनाने में स्थानीय जनप्रतिनिधियों का बड़ा योगदान रहा है। रोहतास की मुखिया अनिता टोप्पो, दरभंगा की कविता देवी, पूर्वी चंपारण की तान्या प्रवीण और औरंगाबाद की अमृता देवी ने खुद केंद्रों पर जाकर खिलौने वितरित किए। वहीं पूर्णिया जिले में जिला प्रोग्राम पदाधिकारी सुगंधा शर्मा और जिला पदाधिकारी अंशुल कुमार ने पोषण पखवाड़ा की गतिविधियों को सही दिशा देने में मार्गदर्शन किया।
Frequently Asked Questions (FAQs)
बिहार में खिलौना दान अभियान कब तक चला
पोषण पखवाड़ा 2026 का आयोजन 9 अप्रैल से 23 अप्रैल तक था, लेकिन खिलौना दान अभियान एक जन-आंदोलन के रूप में 11 मई 2026 तक जारी रहा।
इस अभियान का बच्चों पर क्या असर पड़ेगा
इससे आंगनवाड़ी केंद्र बाल-अनुकूल बनेंगे, जिससे 3-6 साल के बच्चों का मानसिक, सामाजिक और रचनात्मक विकास होगा और उन्हें खेल-खेल में सीखने का मौका मिलेगा।