Bihar: बिहार सरकार ने राज्य के आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों को पोशाक देने के लिए एक खास पहल की है। अब बच्चों को मिलने वाले कपड़े जीविका दीदियों द्वारा तैयार किए जा रहे हैं। इससे बच्चों को अच्छी क्वालिटी की ड्रेस मिल रही
Bihar: बिहार सरकार ने राज्य के आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों को पोशाक देने के लिए एक खास पहल की है। अब बच्चों को मिलने वाले कपड़े जीविका दीदियों द्वारा तैयार किए जा रहे हैं। इससे बच्चों को अच्छी क्वालिटी की ड्रेस मिल रही है और गांव की महिलाओं की कमाई का जरिया भी खुला है।
इस योजना से किसे और क्या फायदा मिल रहा है
राज्य के लगभग 1.15 लाख आंगनबाड़ी केंद्रों में पढ़ने वाले 50 से 52 लाख बच्चे इस योजना के लाभार्थी हैं। सरकार ने हर बच्चे के लिए 400 रुपये की वार्षिक लागत तय की है। जनवरी 2026 से बच्चों को दो सेट पोशाक देने का काम शुरू हुआ, जिसे मार्च 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया। अब तक 10 लाख से ज्यादा ड्रेस बांटी जा चुकी हैं।
जीविका दीदियों के लिए रोजगार के अवसर
इस काम से ग्रामीण महिलाओं को सीधा आर्थिक लाभ मिल रहा है। वर्तमान में 1.5 लाख से ज्यादा महिलाएं इस काम से जुड़ी हैं और भविष्य में यह संख्या 5 लाख तक पहुंचने की उम्मीद है। सिलाई के काम से जुड़ी महिलाओं की औसत मासिक आय 10,000 रुपये तक पहुंच गई है। सरकार ने इसके लिए अलग से सिलाई घर और ट्रेनिंग सेंटर भी बनाए हैं।
योजना की मुख्य बातें और नियम
| विवरण |
जानकारी |
| कुल लाभार्थी बच्चे |
50 से 52 लाख |
| पोशाक की लागत |
400 रुपये प्रति बच्चा |
| जुड़ी हुई महिलाएं |
1.5 लाख (लक्ष्य 5 लाख) |
| मासिक औसत आय |
10,000 रुपये |
| कुल आंगनबाड़ी केंद्र |
1.15 लाख |
| निगरानी सिस्टम |
मोबाइल ऐप और सॉफ्टवेयर |
सरकार ने गुणवत्ता बनाए रखने के लिए स्टिच मॉनिटरिंग सिस्टम और मोबाइल ऐप शुरू किया है। इसके अलावा, आंगनबाड़ी सेविका और सहायिका को भी जीविका दीदियों द्वारा सिली गई साड़ियाँ दी जाएंगी। आने वाले समय में कक्षा 1 से 5 तक के स्कूली बच्चों की पोशाक भी जीविका दीदियों से ही सिलवाई जाएगी।