Bihar: बिहार के अलग-अलग जिलों में भगवान सूर्य की कई प्राचीन प्रतिमाएं मिली हैं। इन मूर्तियों की सबसे खास बात यह है कि इनमें भगवान सूर्य के हाथों में कमल के फूल हैं और पैरों में लंबे बूट पहने हुए दिखाए गए हैं। इतिहासकार औ
Bihar: बिहार के अलग-अलग जिलों में भगवान सूर्य की कई प्राचीन प्रतिमाएं मिली हैं। इन मूर्तियों की सबसे खास बात यह है कि इनमें भगवान सूर्य के हाथों में कमल के फूल हैं और पैरों में लंबे बूट पहने हुए दिखाए गए हैं। इतिहासकार और पुरातत्व विशेषज्ञ इन खोजों को बहुत महत्वपूर्ण मान रहे हैं क्योंकि इनसे राज्य के पुराने इतिहास के कई राज खुल सकते हैं।
इन मूर्तियों की क्या है खासियत और कहां-कहां मिलीं
बिहार के मुजफ्फरपुर, शिवहर, जमुई और वैशाली जैसे इलाकों से ये प्रतिमाएं मिली हैं। इनमें से अधिकतर मूर्तियां पाल काल (Pala period) की बताई जा रही हैं। मुजफ्फरपुर के सुस्ता पंचायत में मिली मूर्ति को 9वीं शताब्दी का बताया गया है। वहीं, जमुई के सिझौरी गांव में तालाब की खुदाई के दौरान 10वीं शताब्दी की तीन फुट ऊंची मूर्ति मिली थी। वैशाली के कोल्हुआ में मिली सूर्य प्रतिमा को सबसे पुराना माना जा रहा है।
INTACH बिहार क्या कर रहा है और विशेषज्ञों की क्या राय है
Indian National Trust for Art and Cultural Heritage (INTACH) बिहार चैप्टर इन सभी मूर्तियों का पूरा रिकॉर्ड तैयार कर रहा है। डॉ शिव कुमार मिश्रा के मुताबिक राज्य भर में करीब 150 मूर्तियों का डेटा इकट्ठा किया गया है। इन्हें शुंग-कुषाण, गुप्त, पाल-कर्णत और मध्यकालीन समय के आधार पर बांटा जा रहा है। INTACH की यह विस्तृत रिपोर्ट 20 जून 2026 तक आने की उम्मीद है।
प्राचीन मूर्तियों के रखरखाव को लेकर जताई गई चिंता
विशेषज्ञों ने इस बात पर चिंता जताई है कि कई कीमती प्राचीन मूर्तियां सरकारी म्यूजियम में रखने के बजाय पुलिस थानों में पड़ी हैं। डॉ शिव कुमार मिश्रा ने कहा कि यह नियमों का उल्लंघन है और इन धरोहरों को सुरक्षित रखने के लिए कोर्ट के सख्त निर्देशों की जरूरत है। फिलहाल, शिवहर में मिली 100 किलो से ज्यादा वजन वाली मूर्ति को दरभंगा के चंद्रधारी म्यूजियम भेजा गया है, जबकि मुजफ्फरपुर की मूर्ति रामचंद्र शाही म्यूजियम में रखी गई है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
बिहार में मिली सूर्य प्रतिमाओं की मुख्य विशेषता क्या है?
इन प्रतिमाओं में भगवान सूर्य को खड़े मुद्रा में दिखाया गया है, जिनके दोनों हाथों में कमल के फूल हैं और पैरों में लंबे बूट पहने हुए हैं।
ये मूर्तियां किस काल की मानी जा रही हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार ये मूर्तियां मुख्य रूप से पाल काल (Pala period) की हैं, जो 9वीं और 10वीं शताब्दी के आसपास की हैं।