Bihar: भागलपुर के विक्रमशिला सेतु पर आवाजाही बंद होने से परेशान लोगों के लिए अच्छी खबर है। सेतु पर बन रहे अस्थायी बेली ब्रिज का काम तेजी से चल रहा है और जून के पहले सप्ताह, खासकर 5 जून तक छोटे वाहनों का परिचालन शुरू होने
Bihar: भागलपुर के विक्रमशिला सेतु पर आवाजाही बंद होने से परेशान लोगों के लिए अच्छी खबर है। सेतु पर बन रहे अस्थायी बेली ब्रिज का काम तेजी से चल रहा है और जून के पहले सप्ताह, खासकर 5 जून तक छोटे वाहनों का परिचालन शुरू होने की उम्मीद है। इससे दक्षिण बिहार और सीमांचल क्षेत्र के बीच फिर से संपर्क जुड़ जाएगा और लाखों यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।
बेली ब्रिज का काम और समय सीमा क्या है?
विक्रमशिला सेतु के एक हिस्से का स्लैब 4 मई 2026 को गिर गया था, जिसके बाद BRO और MES ने 16 मई से बेली ब्रिज का निर्माण शुरू किया। भागलपुर के DM नवल किशोर चौधरी ने बताया कि काम युद्ध स्तर पर चल रहा है और 5 जून तक इसे चालू करने का लक्ष्य है। ट्रैफिक शुरू करने से पहले सुरक्षा जांच और लोड टेस्टिंग की जाएगी। वर्तमान में इस पुल का 50 प्रतिशत से ज्यादा काम पूरा हो चुका है।
कौन सी गाड़ियां चल सकेंगी और पुल की क्षमता कितनी है?
यह अस्थायी बेली ब्रिज केवल हल्के वाहनों के लिए बनाया जा रहा है। इसकी लंबाई करीब 49-50 मीटर और चौड़ाई 5 मीटर होगी। इस पुल पर अधिकतम 10 टन वजन तक की गाड़ियां, जैसे कि दोपहिया और चार पहिया वाहन ही चल पाएंगे। भारी व्यावसायिक वाहनों के लिए अभी भी कार्गो जहाजों और शिप का ही इस्तेमाल करना होगा।
आम जनता और अन्य क्षेत्रों पर क्या असर पड़ेगा?
पुल बंद होने से बिहार के 16 जिलों और झारखंड के संथाल परगना क्षेत्र के पांच जिलों के करीब 1 लाख लोगों की दैनिक यात्रा प्रभावित हुई थी। बेली ब्रिज शुरू होने से भागलपुर और नौगहिया के लोगों को सीधा फायदा होगा। वहीं, मुख्य सेतु की मरम्मत में करीब तीन महीने लगेंगे और एक नया फोर-लेन पुल दिसंबर 2026 तक बनकर तैयार होने की उम्मीद है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
विक्रमशिला सेतु पर बेली ब्रिज कब तक शुरू होगा?
प्रशासन के अनुसार, बेली ब्रिज का काम जून के पहले सप्ताह तक पूरा होने की उम्मीद है और 5 जून 2026 तक छोटे वाहनों के लिए इसे खोल दिया जा सकता है।
क्या इस पुल पर भारी ट्रक और बसें चल सकेंगी?
नहीं, यह अस्थायी पुल केवल 10 टन तक की क्षमता वाला है, इसलिए इस पर सिर्फ छोटी गाड़ियां और हल्के वाहन ही चल पाएंगे। भारी वाहनों के लिए जहाज और शिप का विकल्प रहेगा।