Bhagalpur में श्रावणी मेला 2026 का आगाज, धांधी बेलारी महाशिविर में गूंजे शिव भजन
Bhagalpur: विश्वप्रसिद्ध श्रावणी मेला 2026 के मौके पर कच्ची कांवरिया पथ पर स्थित धांधी बेलारी महाशिविर में बुधवार को सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत हुई। भागलपुर जिला प्रशासन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का उद्घाटन उप विक
Bhagalpur: विश्वप्रसिद्ध श्रावणी मेला 2026 के मौके पर कच्ची कांवरिया पथ पर स्थित धांधी बेलारी महाशिविर में बुधवार को सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत हुई। भागलपुर जिला प्रशासन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का उद्घाटन उप विकास आयुक्त (DDC) ने दीप जलाकर किया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य कांवर यात्रा पर निकले लाखों शिवभक्तों और श्रद्धालुओं का मनोरंजन और मार्गदर्शन करना है।
इस साल श्रावणी मेले का औपचारिक उद्घाटन 28 जुलाई को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अजगैवीनाथ धाम में किया था। धांधी बेलारी में शुरू हुए ये सांस्कृतिक कार्यक्रम 30 जुलाई से 28 अगस्त 2026 तक चलेंगे। जिला प्रशासन और कला एवं संस्कृति विभाग मिलकर इन कार्यक्रमों को संचालित कर रहे हैं। जिला कला संस्कृति पदाधिकारी अंकित रंजन ने बताया कि कलाकारों के चयन के लिए 15 जुलाई तक ऑनलाइन आवेदन लिए गए थे।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रशासन ने कई खास इंतजाम किए हैं। इस बार पहली बार ‘जीविका दीदी की रसोई’ शुरू की गई है, जहाँ कांवरियों को बिना लहसुन-प्याज और सेंधा नमक वाला सात्विक भोजन मिलेगा। इससे स्थानीय महिलाओं को रोजगार भी मिल रहा है। सुरक्षा और सुविधा के लिए पूरे मेला क्षेत्र को 13 सेक्टरों में बांटा गया है, जिसमें अलग कंट्रोल रूम और पुलिस बल की तैनाती की गई है।
| सुविधा/कार्यक्रम | विवरण |
|---|---|
| सांस्कृतिक कार्यक्रम | 30 जुलाई से 28 अगस्त तक |
| खास आकर्षण | ड्रोन शो और शिव भजन |
| भोजन व्यवस्था | जीविका दीदी की रसोई (सात्विक भोजन) |
| तकनीकी मदद | श्रावणी मेला मोबाइल ऐप लॉन्च |
| सुरक्षा व्यवस्था | 13 सेक्टरों में विभाजन और नियंत्रण कक्ष |
| अन्य इंतजाम | धूप से बचाव के लिए मैट और स्विस कॉटेज |
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने उद्घाटन के दौरान मेले की स्मारिका और मोबाइल ऐप भी लॉन्च किया। इस दौरान उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव समेत कई मंत्री मौजूद थे। जिलाधिकारी ने पहले ही सुल्तानगंज का दौरा कर ड्रोन शो और टेंट सिटी जैसी व्यवस्थाओं का जायजा ले लिया था ताकि श्रद्धालुओं को कोई परेशानी न हो।